I am reading and writing on MB besides for Delhi Press English and Hindi magazines.

“We delight in the beauty of the butterfly, but rarely admit the changes it has gone through to achieve that beauty.” – Maya Angelou

ज़िंदगी में ऐसे लम्हें आये

कभी बेगानों ने तो कभी

अपनों ने ही रुलाये

हम इसी कश्मकश में हैं डूबे

किन्हें याद रखें किन्हें भूल जायें .

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तेरी एक मुस्कान ही मेरे लिए हक़ीम है

तेरे बिना मेरा दिल एक यतीम है

न हो यकीं तो आज़मा के देख लो

एक बार जरा मुस्कुरा के मुझे देख लो .

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किसी ने क्या खूब कहा है -

वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है

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लोग मुझे रोज दे रहे हैं नसीहत
उम्र हो गयी कर लो वसीयत
जो थोड़ी बहुत खुशियां मिलीं थीं
उन्हें हमने पहले ही बाँट दी थी
हमारे पास बचा ही क्या है किसी को देने को
बस कुछ अधूरी हसरतें रह गयीं है दफ़नाने को
उनकी वसीयत कर क्यों खुद फजीहत होऊँ
जी करता है उन्हें साथ ले चैन से सो जाऊँ

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काश मेरी आह तुम्हें भी बेचैन कर जाती
तेरे भी दिन का चैन रातों की नींद उड़ जाती

एक दिन पति अपनी पत्नी के साथ बैंक गया और उसने अपने अकाउंट को पत्नी के साथ जॉइंट कराया .फिर बड़े गर्व से बोला " कुछ ही दिनों में तुम्हारे नाम का डेबिट कार्ड आ जायेगा . तुम ATM से पैसे निकाल सकती हो या किसी मॉल आदि में शॉपिंग कर सकती हो .पर एक बात याद रखना कभी किसी को OTP नहीं बताना ."

पत्नी " नहीं जी , मैं इतनी बेवक़ूफ़ नहीं हूँ ." पत्नी बहुत खुश हो कर बोली
कुछ दिन बाद पत्नी के सेल फोन पर किसी ने फोन किया " मैं आपके बैंक से बोल रहा हूँ , आपके डेबिट कार्ड का लिमिट दोगुना हो जायेगा . तब आप एक बार में ज्यादा पैसा निकाल सकती हैं या शॉपिंग कर सकती हैं . बस आपको एक काम करना है ."

पत्नी " क्या ? "
वह आदमी " आपके फोन पर एक OTP जायेगा उसे हमें तुरंत बता दें ."
पत्नी ने उस आदमी को OTP बता दिया . उस आदमी ने थैंक यू कह कर फोन काट दिया . कुछ देर बाद पति जब घर आया तो पत्नी ने खुश हो कर कहा " अब हमारे डेबिट कार्ड का लिमिट दोगुना हो जायेगा . एक भले आदमी ने फोन कर मुझसे ोटप पूछा बस चुटकियों में काम हो गया."

" हे भगवान. अब तक उसने हमारे अकाउंट से काफी पैसे निकाल लिए होंगे . तुमने सही OTP उसे बता दिया ? "

पत्नी " हाँ 2409 आया था . चूंकि अकाउंट जॉइंट था इसलिए मैंने आधा कर 1200 बता दिया . "

पति " चलो तुम्हारी इस होशियारी या बेवकूफी से हम बाल बाल बच गए ."
फिर पति ने समझाया और हँसते हुए कहा " आगे से कभी किसी को OTP नहीं बताना ."

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Doctor : घबरा मत पांडे.... बहुत छोटा आपरेशन है ....

Patient : Thank you doctor...पर मेरा नाम पांडे नहीं है...!

Doctor : मुझे पता है ..... पांडे मेरा नाम।है...!!!
😀🤣🤣

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न्याय की सत्य घटना --

एक बार मध्यप्रदेश के इन्दौर नगर में एक रास्ते से ‘महारानी देवी अहिल्यावाई होल्कर के पुत्र मालोजीराव’ का रथ निकला तो उनके रास्ते में हाल ही की जनी गाय का एक बछड़ा सामने आ गया।

गाय अपने बछड़े को बचाने दौड़ी तब तक मालोरावजी का ‘रथ गाय के बछड़े को कुचलता’ हुआ आगे बढ़ गया।

किसी ने उस बछड़े की परवाह नहीं की। गाय बछड़े के निधन से स्तब्ध व आहत होकर बछड़े के पास ही सड़क पर बैठ गई।

थोड़ी देर बाद अहिल्यावाई वहाँ से गुजरीं। अहिल्यावाई ने गाय को और उसके पास पड़े मृत बछड़े को देखकर घटनाक्रम के बारे में पता किया।

सारा घटनाक्रम जानने पर अहिल्याबाई ने दरबार में मालोजी की पत्नी मेनावाई से पूछा-
यदि कोई व्यक्ति किसी माँ के सामने ही उसके बेटे की हत्या कर दे, तो उसे क्या दंड मिलना चाहिए?

मालोजी की पत्नी ने जवाब दिया- उसे प्राण दंड मिलना चाहिए।

देवी अहिल्यावाई ने मालोराव को हाथ-पैर बाँध कर मार्ग पर डालने के लिए कहा और फिर उन्होंने आदेश दिया मालोजी को मृत्यु दंड रथ से टकराकर दिया जाए। यह कार्य कोई भी सारथी करने को तैयार न था।

देवी अहिल्याबाई न्यायप्रिय थी। अत: वे स्वयं ही माँ होते हुए भी इस कार्य को करने के लिए भी रथ पर सवार हो गईं।

वे रथ को लेकर आगे बढ़ी ही थीं कि तभी एक अप्रत्याशित घटना घटी।

वही गाय फिर रथ के सामने आकर खड़ी हो गई, उसे जितनी बार हटाया जाता उतनी बार पुन: अहिल्याबाई के रथ के सामने आकर खड़ी हो जाती।

यह दृश्य देखकर मंत्री परिषद् ने देवी अहिल्यावाई से मालोजी को क्षमा करने की प्रार्थना की, जिसका आधार उस गाय का व्यवहार बना।

उस तरह गाय ने स्वयं पीड़ित होते हुए भी मालोजी को द्रौपदी की तरह क्षमा करके उनके जीवन की रक्षा की।

इन्दौर में जिस जगह यह घटना घटी थी, वह स्थान आज भी गाय के आड़ा होने के कारण ‘आड़ा बाजार’ के नाम से जाना जाता है।

उसी स्थान पर गाय ने अड़कर दूसरे की रक्षा की थी। ‘अक्रोध से क्रोध को, प्रेम से घृणा का और क्षमा से प्रतिशोध की भावना का शमन होता है’।

भारतीय ऋषियों ने यूँ ही गाय को माँ नहीं कहा है, बल्कि इसके पीछे गाय का ममत्वपूर्ण व्यवहार, मानव जीवन में, कृषि में गाय की उपयोगिता बड़ा आधारभूत कारण है।

"गौसंवर्धन करना हर भारतीय का परम कर्तव्य भी है"

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जीवन की आपाधापी में ,

कहाँ छूट गए पता नहीं हमें ,

कोई आगे निकला कोई पीछे छूट गया ,

आखिर में जब हिसाब लगाया

तो पता नहीं क्या पाया क्या खोया .

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