Best Humour stories stories in hindi read and download free PDF

चौकीदार
by R.KapOOr
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बात बहुत पुरानी तो नहीं है। मकरसंक्रांति का दिन था, मैं पतंगे उड़ाने के लिए डोर और पतंगें ले कर छत पर आ गया । चूंकि फ्लैट्स में छत ...

लौट के बुद्धू घर को आये - (पार्ट 2)
by किशनलाल शर्मा
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सालों पुरानी बात है।चार दशक से   ज्यादा हो गए।जून का महीना था।मई और जून तोसुबह धूप निकलते ही गर्मी का प्रकोप बढ़ने लगता जो दिन बढ़ने के साथ मे ...

लौट के बुद्धू घर को आये - (पार्ट 1)
by किशनलाल शर्मा
  • 1.1k

बाबानाम   सुनते ही आप  सोचने लगेे        होंगे । केसरिया वस्त्र ,    बड़ी बड़ी  जटा,  हाथ मे कमंडल और चिमटा या  किसी नंग धड़ंग शरीर पर ...

फादर्स डे पर पिता जी की याद में
by डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना
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फादर्स डे पर पिता जी की याद में                                                                                               स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना                  डुकरा करोना पीड़ित वृद्ध के अस्‍पताल में भर्ती के उपरांत स्‍वस्‍थ होने पर घर ...

लूज कंट्रोल
by Saroj Prajapati
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कई दिनों से राजन और गरिमा का मूड एक दूसरे से काफी उखड़ा उखड़ा था। दोनों ही आपस में ढंग से बात नहीं कर रहे थे। सुबह उठकर नाश्ता, ...

गोलोकधाम
by suraj sharma
  • 1.1k

न तद्भासयते सूर्यो न शशांको न पावकः ।यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥                                ...

टीके की कहानी
by Anand M Mishra
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टीका-टीका-टीका!! आज सभी जगह एक ही चर्चा है। आपने टीका लगवा लिया? जिसने लगवा लिया है वह अपनी बत्तीसी दिखाता है तथा जिसने नहीं लिया है वह मुंह फुलाया ...

प्रजातंत्र का इतिहास
by Anand M Mishra
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कुछ जानकार लोग कहते हैं - प्रजातंत्र की उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'डेमोस' से हुई है। डेमोस का अर्थ है 'जन साधारण' और क्रेसी का अर्थ है 'शासन'। लेकिन यह तथ्य ...

हिन्दी या हिग्लिश
by Alok Mishra
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     हिन्दी या हिंग्लिश     भाषाएं रस बदलती है, विलुपत होती है और परिष्कृत होती हैं। भाषाओं के परिवर्तन का सिलसिला हमशा जारी रहता है। वर्तमान में विश्व ...

बहस--परिचर्चा
by किशनलाल शर्मा
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गांव की चौपालों और गली मोहल्लों के चबूतरों से निकलकर बहस टी वी चैनलो पर जा पहुंची है।आज कोई भी न्यूज़ चैनल बहस यानी परिचर्चा से अछूता नही है।धर्म,राजनीति,खेल,फ़िल्म, ...

अन्ना राजनीति में ‘‘मत’’ जाना ....
by Alok Mishra
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अन्ना राजनीति में ‘‘मत’’ जाना ....यह आलेख उस समय की तात्कालीन परिस्थितियो में व्यवस्था पर व्यंग्य के रूप में लिखा गया था जो अनेक अखबारों में प्रकाशित भी हुआ ...

बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ? (व्यंग्य)
by Sunil Jadhav
  • 1k

  लेखक- डॉ.सुनील गुलाबसिंग जाधव, नांदेड़ मो.९४०५३८४६७२   मास्टर जी ने कक्षा में एक लोकप्रिय पंक्ति सुनाते हुए कहा, बच्चों अब तुम्हारी बारी | तुम्हे एक कविता करके मुझे ...

ब्रेकिंग न्यूज - रामलाल देश छोड़ेगा (व्यंग्य)
by Alok Mishra
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ब्रेकिंग न्यूज - रामलाल देश छोड़ेगा             अभी-अभी मिले समाचार के अनुसार रामलाल जी  देश छोड़ने पर विचार कर रहे है । हमारे रामलाल जी आजकल बहुत परेशान है ...

११०१
by Sunil Jadhav
  • 2.3k

    लेखक-डॉ.सुनील गुलाबसिंग जाधव नांदेड,महाराष्ट्र   मो-९४०५३८४६७२     एक रात सपने में बाबा गूगल द्वारा आकाशवाणी हुई, बेटा यूजर प्रो.बबन जी! सारी दुनिया वेबीनारा कर रही हैं और आप घोर निद्रा में ...

गरीबी और झूठ ( व्यंग्य )
by Alok Mishra
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     गरीबी और झूठ      मंडी के पास एक हम्माल दीनू और ठेला चलाने वाला छोटू कुछ देर बैठे थे । दीनू बोला "आज तो मंडी में ...

अभी तो ये अंगड़ाई है .. ( व्यंग्य )
by Alok Mishra
  • 1.3k

अभी तो ये अंगड़ाई है ....         एक दिन शहर की एक रैली में लोग जोर-जोर से नारे लगा रहे थे ‘‘ अभी तो ये अंगड़ाई है.....आगे और लड़ाई ...

कहानी भोला की - (अंतिम भाग )
by राज कुमार कांदु
  • 1.4k

पुलिस चौकी से निकल कर भोला एक पार्क के सामने लगे बेंच पर सो गया ।सुबह देर से नींद खुली थी । उठकर अब उसे कुछ काम धाम करने ...

गरीबी सम्मेलन ( व्यंग्य )
by Alok Mishra
  • 999

      गरीबी सम्मेलन       शहर के एक आलीशान होटल में गरीबी सम्मेलन का आयोजन किया गया है । देश-विदेश से इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया ...

कहानी भोला की - 2
by राज कुमार कांदु
  • 1.2k

काफी देर तक आजाद मैदान में घुमते हुए भोला विचार करता रहा । अब क्या करे ? कहाँ जाए ? इतने बड़े शहर में कोई परिचित भी नहीं था ...

कहानी भोला की - 1
by राज कुमार कांदु
  • 1.6k

भोला सत्रह साल का एक ग्रामीण युवक था । अपने नाम के अनुरूप ही सीधा सादा और भोला या यूँ भी कह सकते हैं नाम से भी ज्यादा भोला ...

भैंस की उड़ान ( व्यंग्य)
by Alok Mishra
  • 1k

        भैंस की उड़ान      कहावत तो सुनी होगी " अकल बड़ी या भैंस ।" हमारे आस पास बहुत से लोग हैं जिनके लिए भैंस ही ...

सब मिथ्या है
by Anand M Mishra
  • 1.4k

सब मिथ्या है ईश्वर ने सृष्टि के निर्माण के समय लगता है कि अपना दिमाग बहुत चलाया होगा. यदि जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु को देखते हैं तो मन ...

कोई समाचार नहीं..
by Alok Mishra
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        कोई समाचार नहीं ...      भोलाराम जी को समाचार देखे ,सुने और पढ़े बगैर चैन ही नहीं मिलता । यही कारण है देश ही नहीं ...

ईमानदारी का कीड़ा (व्यंग्य)
by Alok Mishra
  • 1.2k

ईमानदारी का कीड़ा ( व्यंग्य )       हमारे आस-पास सामान्य लोगों की संख्या बहुत अधिक है । आज के समय में सामान्य वही है जो खुद खाता है ...

नो गधा बनाइंग
by Alok Mishra
  • 1.2k

       गधा देश में यूं तो पूरे समय ही राजनीति की बहार रहती है परंतु चुनाव की आहट के साथ ही साथ गधों को गधा बनाने की ...

जुगाड़ (व्यंग्य)
by Alok Mishra
  • 1.5k

         जुगाड़       अरे.....आप शीर्षक पढ़कर क्या सोचने लगे? चलिए तो फिर आपकी और हमारी सोच को ही आगे बढ़ाते हैं । हमारा समाज कुछ ...

सामाजिक देवी
by राज कुमार कांदु
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नमो नारायण की घोर तपस्या से गूगलेश्वर महाराज प्रसन्न हुए और उनसे वर माँगने को कहा।उनके समक्ष नतमस्तक होकर नमो नारायण बोला , " हे सर्वज्ञानी महाराज ! अगर ...

समाज सेवक जी ( व्यंग्य )
by Alok Mishra
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     "समाज सेवा का मजा मेवा जिसने चखा, उसकी जिंदगी धन्य हो गई।" यह वाक्य हमारा नहीं मेवालाल जी का है। मेवालाल वैसे तो एक व्यापारी हैं लेकिन ...

हड़ासंखन गोत्र
by Anand M Mishra
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हमारे बाबा समाज में अपनी हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। गाँव में यदि किसी का मर्यादित मजाक उड़ाना है तो उस वक्त पूरे गाँव में वे बेजोड़ थे। गाँव ...

फाईल दौड़ (व्यंग्य )
by Alok Mishra
  • 891

     फाईल दौड़ (व्यंग्य )        हमारे बाबू साहब अपने ऑफिस में बैठे पान की जुगाली कर रहे थे कि बस अचानक चार फाईलें में अपने ...