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दोष मालूम होते हुए भी त्याग न करना "राग" हैं और
गुण मालूम होते हुए भी स्वीकार न करना "द्वेष" हैं..

सावधान!!

जिनसे द्वेष है, उनसे प्रेम करो,
जिनसे राग है , उसका त्याग करो,
एसा करने से मन शांत हो जाएगा।

-Jagruti Pandya

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संस्कृतं न केवलं एका भाषा, अपितु भारतस्य जीवनदर्शनम्। संस्कृतं भारतस्य एकात्मतायाः भाषा। ज्ञानविज्ञानयोः भाषा। प्राचीनभाषा, आधुनिकभाषा अपि। तत्त्वज्ञानस्य भाषा, सर्वेषां भाषा च।

सर्वेभ्यः संस्कृतदिवसस्य शुभाशयाः।

-Jagruti Pandya

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आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची हो जो एक बूंद भी लहू की
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

-Jagruti Pandya

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