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जरूरी नहीं की, जिनमे साँसे नही वो ही मुर्दा है ! जिनमे इंसानियत नही वो कोन से जिंदा है !

आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं,

सामान सौ बरस का है पल की ख़बर नहीं..!!

न किस्सों में, और न किस्तों में,
जिंदगी की खूबसूरती है चंद सच्चे रिश्तों में !

सख़्त हाथों से भी छूट जाती हैं कभी उंगलियाँ,
रिश्ते ज़ोर से नहीं तमीज़ से थामे जाते हैं!

भूख रिश्तों को भी लगती है
कभी प्यार परोस कर तो देखिये।

सिर्फ इंसान ही गलत नही होते, वक़्त भी गलत हो सकता है ।

मुस्कुराने के बहाने जल्दी खोजो, वरना
जिन्दगी रुलाने के मौके तलाश लेगी !

नफरत खुलकर और मुहब्बत छिपकर करते हैं !

हम अपनी ही बनाई दुनियां से कितना डरते है।:)

उम्र...

बिना रुके सफर कर रही है,

और हम...

ख़वाहिशें लेकर वहीं खड़े हैं...!