Hey, I am on Matrubharti! सत्य बोलो, प्रिय बोलो हिंदी भाषा का बोध करें और सम्मान दें, हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है और हिंदी हमारे देश की पहचान है, इसलिए " गर्व से कहो हम भारतीय हैं "

#निजी
पंछियों को पिंजरे में कैद रखने वालों
आज #निजी अंजाम देख कर भी होश में आओ।
उनको भी मोहब्बत होगी किसी अपने से
उन्हें भी आजाद रहने दो इतना भी ना सताओ।।
।। ज्योति प्रकाश राय ।।

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#निजी
आज जब हर देश इस वायरस के संकट से जूझ रहा है तब भी पड़ोसी देश पाकिस्तान चल चल रहा है।
अपने देश की #निजी जनसंख्या में से वह कुछ अल्पसंख्यक हिन्दुओं को किसी भी प्रकार की सहायता देने से साफ इंकार कर रहा है।
तब मुझे अपने ही लिखे हुए कुछ शब्द बोलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
हम भी तो ज्ञान बांटते हैं, क्यूं ना उनको हम पहचाने ?
आखिर कब तक हम मित्र कहें? हरकत क्यूं ना हम जाने?
हम तो देते संदेश प्रेम का, क्या उन्हें नहीं लेना आता ?
या जिस संदेश को वो पहचाने, वो हमे नहीं देना आता ।।
यह वीर रस की कविता है। पूरा सुनने के लिए आप यू ट्यूब के चैनल meri bhasha meri shaily से देख और सुन सकते हैं। जिसे मैंने पुलवामा अटैक के लिए बनाया है।

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#निजी विचार कोरोना वायरस से बचने के लिए
मेरी भाषा मेरी शैली

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#निजी
निजी जीवन तुम जियो, हम जिये तो पाप।
ये कहा का प्रेम है ? उत्तर दीजिए आप।।
निज अपने सपने जिये, प्रेम जिये निज संग।
समय हुआ प्रतिकूल तो, लगे छुड़ावन अंग।।
निज जननी के प्रेम को, क्या जाने संसार।
हर्षित हो पितु आत्मा, मातृ बने हरिद्वार।।
हाय हाय कर जग मुआ, हाय न देखत तोहि।
निजि आवत जब अंत तब, राम न आवत मोहि।।
।। ज्योति प्रकाश राय ।।

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#picture

चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।
मनुष्यता को भंग किया, शहर वो वुहान है।।
प्रकृति छेड़ता गया, जीव तोड़ता गया।
स्वयं पर घमंड किया, मनुष्य ही महान है।।
चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।।

मनुष्यों के रोग से, मनुष्य डगमगा रहे।
हो रही निशा जहां, विद्युत जगमगा रहे।।
औषधि विफल सबके, जो भी ज्ञानवान हैं।
चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।।

मंदिरों के द्वार सभी, बंद खुद करा दिया ।
मानवों के जीत में, खुद को भी हरा दिया ।।
दानवी प्रहार हुआ, बुद्धि भ्रांतिमान है।
चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।।

सरल राम - राम रटो, वही खेवनहार हैं।
कोरोना विषाणु मिटे, राम ही प्रहार हैं।।
विधि का ये विधान है, कि ज्योति दिव्यमान है।
चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।।

।। ज्योति प्रकाश राय ।।

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#Kavyotsav2
God

होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे !
भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने
ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने
प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे !
भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे
मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे
प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे !
भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को
ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को
आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे !
भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!
!! ज्योति प्रकाश राय !!

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#Kavyotsav2
लान करो भारत बंदी का, मत ध्यान रखो प्रगति की मंदी का।
जब-जब मन का गति मंद हुआ, तब-तब यह भारत बंद हुआ।

क्या नेता यही पढ़ा करते, या गठबंधन में गढ़ा करते।

कुछ तो करतब दिखलाना है, चलो भारत बंद कराना है।
ऐ राजनीति से खेलने वालों, क्या परंपरा को भूल गये।
कुर्बान हुये जो वीर पुरुष, उस लहू, धरा को भूल गये।

मत अपमान करो भारत माँ का, यह देश नहीं इक नारी है।

सुत कुर्बान हुये जिनकी रक्षा में, उस माँ की महिमा प्यारी है।
ऐ सिंहासन के चाहने वालों, क्या मिलता है इस बंदी से।
यदि शिक्षित हो तो मत रोको, बढ़ते कदमो को डंडी से।

मानो कहना संत पुत्र का, यह देश नहीं मेरा घर है।

भारत माँ की जय गूंजेगा, हिन्द देश का प्रेम अमर है।

।। ज्योति प्रकाश राय।।

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#Kavyotsav2
जगह आपके दिल में बनाने आया हूँ ,

महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।
बड़ी दूर का सफर था, मै आप लोगों से बे-खबर था
मीठे अल्फाज सुनने और सुनाने आया हूँ,

महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

जहाँ उद्योग कालीन का छाया है,

यह शख्स जिला भदोहीं से आया है
मै अपनी पहचान बताने आया हूँ,

महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

यह संत पुत्र , आज मंच पर बोल रहा,
दो टूक शब्द जो लिख पाया, उसमे खुद को तोल रहा,
निखरेंगे शब्द पंक्तियों से, विश्वास दिलाने आया हूँ

महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

अद्भुत और अलौकिक यह, रंग मंच इतिहास रहे,
वाह वाह क्या बात है के इस प्रांगण में,

कविवर ज्योति प्रकाश कहे।
गीतों की माला ले कर, ह्रदय लगाने आया हूँ,

महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

।। ज्योति प्रकाश राय।।

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होली की हार्दिक शुभकामनायें 

होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे !

भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने 

ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने 

प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे !

भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे 

मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे 

प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे !

भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को 

ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को 

आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे !

भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! 

!! ज्योति प्रकाश राय !!

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महकती शाम से ग़मों का नाम मत पूछो
जवां रात से ढलने का अंजाम मत पूछो
नशा करते हो तो बे-शक पी लो मेरी आँखों से
ये अनमोल हैं इनका दाम मत पूछो

My video coming soon on You Tube channel " Meri Bhasha Meri Shaily "

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