Hi, I am on Matrubharti मेरा YouTube चैनल मेरी भाषा मेरी शैली Instagram - meribhashamerishaily (Blog. meribhashamerishaily.blogspot.com) ........ twitter account, @RaiJyotiprakash ........ facebook... jyoti prakash rai हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है और हिंदी हमारे देश की पहचान है, इसलिए " गर्व से कहो हम भारतीय हैं "

डूब रहे हैं लोग नशे में, कोई कश्ती पतवार लेकर आओ
शिकारी खुद हो रहे शिकार, कोई तलवार लेकर आओ
अब होश नहीं इनको, नहीं डर है बदनामी का
ये कितने हो रहे बेकार, कोई गुलज़ार बनकर आओ

#शिकार

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सम्मान पत्र

#हिंदी

हिन्दी दिवस

सत्य सनातन धर्म संस्कृति
अमर रहे युग अम्बर तक
ईश्वर की कृपा दृष्टि बर्षे
तुलसी शशि सूर दिगम्बर तक

नारायण नारायण जगत पुकारे
नारायण रीझै मृदु भाषा पर
संस्कृत अतिउत्तम उत्तम हिन्दी
जीवन हिन्दी की आशा पर

अनमोल धरोहर विश्व सुंदरी
श्रृंगार सवारे है बिंदी
हिन्दी अपने राष्ट्र की भाषा
भविष्य निखारे है हिन्दी

आओ कदम से कदम मिलाएं
हिन्दी विश्व जगत फैलाएं
हिन्दी की महिमा जाने हम
हिन्दी को मिलकर शीश झुकाए

।। ज्योति प्रकाश राय ।।

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उसके कानों में कुण्डल, अहसास कराता है जीने का
उसके आंखों में काजल, विश्वास दिलाता है जीने का

उसके जुल्फों से घटाओं के घिरने का अंदेशा होता है
उसके होठों से कुछ सुनना ही संदेशा होता है

।। ज्योति प्रकाश राय ।।

#विश्वास

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#कलंक

अपने कलंक अपने अंकुश का
किस पर तुम रोष दिखाते हो
खुद तबाह कर के समाज को
भारत पर दोष लगाते हो

भारत नहीं कलंकित है
भारत नहीं दुराचारी
भारत नहीं भ्रष्ट व्यापित
भारत नहीं अहंकारी

भारत में शाम सहर वालों
भारत पर पंक लगाते हो
जिस भारत पर आंच नहीं आई
उसपर कलंक लगाते हो

दोषी जो ठहराए जाएंगे
उनको दण्डित होना होगा
भारत पर दाग़ लगाने वालों
तुमको खण्डित होना होगा

भारत की छवि धूमिल करके
भारत को आंख दिखाते हो
खुद " मानव " के हत्यारे होकर
मानव को बहकाते हो

।। ज्योति प्रकाश राय ।।

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ऐसे निर्छल भारत पर, कुछ दाग़ लगाये जाते हैं
खुद का जीवन अंधकार, और आग लगाए जाते हैं

भ्रष्टाचार की जड़ बनकर, विश्वास जमाए जाते हैं
विश्वसनीय पात्र बनकर, परिहास उड़ाए जाते हैं

मानवता की मृत्यु कर, अंकुश भी नहीं मानते हैं
भारत में रहकर शत्रु बने, भारत से रार ठानते हैं

कैसे विश्वसनीय कहूं इनको, कैसे इनका पक्ष धरूं
ज्योति प्रकाश भारत वासी,भारतीय का साक्ष्य धरूं

#विश्वसनीय

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हाथ लगता नहीं है बड़ा कुछ अगर
ये ना समझो कि मेरा नहीं कुछ रहा
खेल किस्मत का है फिर भी खेलो इसे
चाल किसकी पड़े ये किसको पता

जीत जाओगे तुम भी ये तुम ठान लो
हार समझो ना अपनी कहानी में है
हो गए जो कभी मन से घायल सुनो
याद करना युधिष्ठिर की बानी में है

क्या नहीं दुःख सहे क्या नहीं वो सुने
फिर भी आंखों में लाए न पानी कभी
एक दिन वो विजय रथ को हासिल किए
हार अपनी उन्होंने न मानी कभी

मुश्किलों का दौर मुश्किलों की घड़ी
कब तक टिकेगी हमारे लिए
इतिहास यूं ही नहीं गवाही देता
संघर्ष का उदाहरण है हमारे लिए

।। ज्योति प्रकाश राय ।।

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वीर रस की कविता की एक पंक्ति जो मौजूदा हालात बयां करे।

लद्दाख नहीं है साझे की
यह भारत का हिस्सा है

हर व्यक्ति पड़ोसी हक चाहे
यह जन्म जन्म का किस्सा है

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