जन्म एवम स्थान - 2 अगस्त 1974. लखनऊ.स्वतंत्र लेखन- कविता, कहानी, उपन्यास, प्रकाशन- कहानी संग्रह (प्यासी नदी बहती रही )लघुकथा संग्रह (लिखी हुई इबारत ), उपन्यास- मन न भये दस बीस. वह बुरी लड़की.सम्पादन- दो लघुकथा संकलन ( आस पास से गुजरते हुए, समकालीन प्रेम विषयक लघुकथाएँ ) सहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका- ( अविराम साहित्यिकी) में सह सम्पादक. प्रसारण- आकाशवाणी से रचनाओं का प्रसारण. इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन.

आखिरकार, सब ठीक हो चला, पर यह कैसी कसक है ?

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जीवन अब व्यवस्थित हो चला था, सब कुछ सहज होने लगा था कि ....

ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 8" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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चलो हालातों को अपने मुताबिक ढालने की कोशिश करते हैं .... यही ख्याल करके वह लौट आयी -

ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 7" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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मुहब्बत में नहीं है फर्क कोई
जीने का और मरने का
उसी को देखकर जीते हैं
जिस काफ़िर पे दम निकले

कितना मन को साधा था उसने, कितने समझौते किये, अपनी ख़्वाहिशों का क़त्ल किया। क्या इसलिए ...?

ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 6" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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उसके जीवन मे वह मोड़ आ ही गया, जिसने सब कुछ बदलकर रख दिया.....

ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 5" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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ख्वाब हकीकत में बदल रहा था, परन्तु यह कैसा मोड़ आया ! जानने के लिए पढ़ें -

ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 4" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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उसकी वह मुराद पूरी होने वाली थी जिसकी उसने कभी कल्पना भी न कि थी। परन्तु उस मुराद के साथ यह कैसी चुभन ?

ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 3" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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शिखर, जिस अनदेखे नाम को लेकर उसकी उत्कंठा का ठिकाना न था, आखिर वह आ ही गया। पढ़ें मातृभारती पर उपन्यास ' उर्वशी ' में -

ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 2" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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पढ़ें एक ऐसा उपन्यास, जिसमें रोमांस भी है और दर्द भी, मिलन भी, बिछोह भी, बेशुमार प्रेम भी और गहरी टीस भी। कई तरह के ट्विस्ट एंड टर्न्स से भरी कहानी ' उर्वशी ' ।


ज्योत्सना कपिल लिखित कहानी "उर्वशी - 1" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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