ये खुदा..
तु भी तो इस साजिश मे शामील होगा,
लिख देना था मेरी किस्मत में दर्द
बेहीसाब....
तो ये इश्क कैसे न होता,
लिख दिया तुने मेरे मुकद्दर मे क्यू ये..
ये इश्क यू ही अचानक किसीसे
नही होता...

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कुछ बाते कागजो पर नही
सिर्फ दिल पर लिखी जाती है..
इसे मिटाने की कोशीश भी
करके देख लो...
गर, कामयाब हो जाओगे..
तो हमे भी बताना...

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वो सुबह कितनी खुबसुरत
कुछ और थी,

जब स्कूल कॉलेज जाने की
जल्दी रहती थी...

चुप थे तो सुकून सा था,
खामोशी जो टुट गई.. तो..
लोग भी इतराने लगे..

आज भी गुस्सा आता है
अपनी बेवकूफियों पे,
क्यू पिघल गया था दिल..
झुठी आहट पे...

खुद की गलती पर भी नजऱ रखीए .. जनाब..
गलती हमेशा सामने वाले की ही हो,
जरूरी तो नही....