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Kalyan Singh लिखित कहानी "रिक्शावाला" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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Kalyan Singh लिखित कहानी "दशहरे का मेला" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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Kalyan Singh लिखित कहानी "दो किलो आम का मूल्य" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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My new story Wo Chala gaya ...

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कल्याण सिंह की नयी कहानी 'पापा का आखिरी खत' बिल्कुल मुफ्त में

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समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

जहाँ एक समय दिन है,
तो एक समय रात ।
एक समय बारिश है ,
तो एक समय अकाल ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

जहाँ एक समय पुत्र है,
तो एक समय पिता ।
जहाँ एक समय कष्ट है,
तो एक समय आराम ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

जहाँ एक समय दोस्त है ,
तो एक समय दुश्मन ।
जहाँ एक समय अपने है,
तो एक समय पराये ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

गिन के मिले है दो पल,
क्या किसी से दुश्मनी ।
क्या किसी से शिकवा,
छोड़कर सारे अहंकार ।।

ऐसे जियो इस पल को ,
जो करे दूसरो का उपकार ।
ताकि याद रखे दुनिया ,
चले जाने के बाद ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

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#बढ़ना
इस दुनिया में जन्म लेने का मतलब है कि सुख और दुख दोनों से सामना होना ।

चाहे सुख हो या दुख ,
चाहे अपने या पराये साथ में हो या ना हो
जो भी है हमारे पास
उस में संतुस्ट रहकर
हमेशा अपने कर्तव्य पर आगे बढ़ते रहना चाहिए
इसी का नाम जिंदगी है

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रह रहकर समय गुजरता गया ।
रह रहकर उसका सपना पूरा होता गया ।।
रह रहकर उसका नाम गायब होता चला गया ।
लेकिन रह रहकर मेरा प्यार और बढ़ता चला गया ।।

रुक जा ओ समय रुक जा ।
लौटकर लेआ वो समय एक बार ।।

जब हमने खाई थी कसमे हजारों बार ,
ये साथ ना टूटेगा जन्मों जन्मों तक

ए खुदा !
एक दुआ है आपसे मेरी
ना निभा सका साथ रहनें का वादा इस जन्म में ,
हो सके तो मिला देना अगले जन्म में हम दोनो को
ताकि पूरा कर सके सभी वादे इस जन्म में
जो हमने खाए थे पिछ्ले जन्म में ।।

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यूँ ही याद करते करते गुज़र गये कितने बरस
बस कुछ ही दिनो में आ जाऊंगी
ये कहाँ था तुमने
गया कितने ही बार तेरे घर
मिला हर बार ताला तेरे घर
टूटा नही हूँ और ना ही टुटने दूँगा
इस दिल को
क्योकिं है भरोसा इस दिल को
तू लौट के आयेगी इस प्यार के खातिर

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