M.sc(chemistry),B.Ed प्रिय दोस्तों, रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला में पता नहीं ऐसा कौन सा केमिकल रिएक्शन हुआ कि मैं साहित्य का हो गया।अब साहित्य लिखता हूँ, साहित्य गाता हूँ और साहित्य जीता हूँ। तो दोस्तों, जिंदगी एक उपवन है और हम सब उसके फूल, खुद महकें और दूसरों को भी महकाएं।। धन्यवाद, राकेश सागर

तेरी यादों का मुझको,
बिछौना मिला,
ये न पूछो कि राहों में,
कौन ना मिला,
बस तुम्हारे लिए ही सँवरती रही,
मैं बिखर जाऊं कण कण,
तुम्हारे लिए,
जिंदगी भर समर्पण तुम्हारे लिए।
-राकेश सागर

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खुदा जाने फिर कब,
मुलाकात होगी,
अकेले अकेले में,
क्या बात होगी,
चले जाते हो,
साथ रहती हैं यादें,
यकीं है मुझे,
फिर हँसी रात होगी।।
-राकेश सागर

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है नहीं अनुकूल मौसम,
आँधियों से लड़ भी जाओ,
चढ़ चुकी है अब पत्यंचा,
ले धनुष को बढ़ भी जाओ,
हौसलों के तरकशों में,
कोशिशों के तीर जिंदा,
कोशिशें तू कर,
उम्मीदों से भरा एक स्वर्ग हूँ,
बीज डालो फिर उगूँगा,
मैं तो भारतवर्ष हूँ।।
-राकेश सागर

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स्वप्न जो आँखों में हैं,
वो नीर बनकर बह न जाए,
मिल सकी जो ना सफलता,
पीर बनकर रह न जाए,
उठ खड़े हो सपनों के,
पँखों को फिर आकाश करके,
मुस्कुराहट तुम बिखेरो,
मैं सृजन का हर्ष हूँ,
बीज डालो फिर उगूँगा,
मैं तो भारतवर्ष हूँ।।
-राकेश सागर

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प्रेम का हूँ मैं शिखर,
इतिहास मेरा प्रेम है,
हूँ बहुत कुछ झेलता,
फिर भी परोसा प्रेम है,
हारने का डर नहीं,
आकर सिकंदर भी झुका था,
आहुति देकर लहू की,
मैं मनाता पर्व हूँ,
बीज डालो फिर उगूँगा,
मैं तो भारतवर्ष हूँ।।
-राकेश सागर

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तू अडिग रह, तू निडर रह,
तू खड़ा रह बस चराचर,
तेरे संकल्पों के आगे,
सर झुकाएगा प्रभाकर,
सुन लो तुम भी चंद्रमा,
राकेश होकर लौट आया,
शुन्य देकर इस जगत को,
मैं चमकता अर्श हूँ,
बीज डालो फिर उगूँगा,
मैं तो भारतवर्ष हूँ।।
-राकेश सागर

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सुन लो मानव मैं तेरे,
सपनों का ही उत्कर्ष हूँ,
खुद को सदियों से सँजोए,
खुद में एक संघर्ष हूँ,
तेरी मेहनत का पसीना,
व्यर्थ यूँ ना जाएगा,
बीज डालो फिर उगूँगा,
मैं तो भारतवर्ष हूँ।।
-राकेश सागर

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रखने की चीजें हटाकर,
दिल तुम्हारा रख रहा हूँ,
हूँ बहुत मैं दूर पर,
मीठे सपन को चख रहा हूँ,
प्रेम की इस ओढ़नी की,
छाँव बस तेरे लिए है,
कह रही हैं ये हवाएँ,
थक गए हो बैठ जाओ,
लग रहा है चाँद आँगन,
आके बोला लौट आओ।।
-राकेश सागर

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