M.sc(chemistry),B.Ed प्रिय दोस्तों, रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला में पता नहीं ऐसा कौन सा केमिकल रिएक्शन हुआ कि मैं साहित्य का हो गया।अब साहित्य लिखता हूँ, साहित्य गाता हूँ और साहित्य जीता हूँ। तो दोस्तों, जिंदगी एक उपवन है और हम सब उसके फूल, खुद महकें और दूसरों को भी महकाएं।। धन्यवाद, राकेश सागर

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Delhi poetry club के पेज पर मैं लाइव था।अगर आप नहीं सुन पाएं हैं तो जरूर सुनें, अगर अच्छा लगे तो आगे share भी करें🙂🙂

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तू अडिग रह,तू निडर रह,
बस खड़ा रह तू चराचर,
तेरे संकल्पों के आगे,
सर झुकाएगा प्रभाकर,
हारने का डर नहीं,
आकर सिकंदर भी झुका था,
आहुति देकर लहू की मैं मनाता पर्व हूँ।
बीज डालो फिर उगूँगा,
मैं तो भारतवर्ष हूँ।।
-राकेश कुमार पाण्डेय"सागर"

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रंग लगा लो, अंग लगा लो,
प्रीत कलश छलका लो जी,
अवसर है शुरुआत नई कर,
आओ खुशी मना लो जी,
मिटें भेद सब इस उपवन से रंगों की रंगोली है,
प्रेम बदरिया बरस रही है,
आओ खेलें होली है।
होली की हार्दिक शुभकामनाएं
💐राकेश कुमार पाण्डेय💐

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आसमां के फलक पर,
उभरी हुई तस्वीर हो,
तृप्त हों मन की छुधाएँ,
वो बरसता नीर हो,
बुझ रही है लौ तुम्हारे बिन,
कहूँ मैं क्या प्रिये,
प्यार के मधुमास की वो,
प्यास लेकर लौट आओ..
-राकेश पाण्डेय"सागर"

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आइए कुछ खिलखिलाते हैं😊😊
*ऋतु है आई बसंती सताने लगी,
खत को पढ़ कर मेरे मुस्कुराने लगी,
इक हुआ हादसा खत पे चटनी गिरी,
वो समझ पान उसको चबाने लगी।।

*तुम गए थे कहाँ, तुमको ढूँढा बहुत,
ना मिले फ्राइडे गुस्सा फूटा बहुत,
देख लो प्रियतमा कितना सूजा हूँ मैं,
तेरे चच्चा ने उस दिन था कूटा मुझे।।

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आया बसंत हुआ मन हर्षित, चारो दिशाओं में शोर हुआ है,
सरसो फूल खिले चहुँ ओर,
भ्रमर मन जैसे अँजोर हुआ है,
खुशबू में डूबी हवा मदमस्त,
यहाँ रसमय सब पोर हुआ है।
आएंगे कंत मोरे अँगना सखी,फागुनमय अब मन मोर हुआ है।।
-राकेश पाण्डेय"सागर"

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अनन्त की ओर यात्रा जारी है....

तुझमें मुझमें है अगर एक बात,
आओ मिल चलें,
तुम कहो जो दिन को मानूँ रात,
आओ मिल चलें,
बस तुम्हारी हाँ से मेरी भी सँवर जाएंगी रातें,
आओ पकड़ो हाथ दे दो साथ,
आओ मिल चलें।।
-राकेश कुमार पाण्डेय"सागर"

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इन नयन में तुम बसी हो,
उन नयन में मैं बसा हूँ,
कोई मुझको तो जँची है,
मैं किसी को तो जँचा हूँ,
जब नयन से नयन का,
मिलना मिलाना हो गया है,
तब से तेरे इश्क में ये,
दिल दीवाना हो गया है। -राकेश कुमार पाण्डेय"सागर"

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