पढ़ने का शौक लेखन तक ले आया ।पहले कुछ लेख और कविताएं लिखीं लेकिन कल्पनाओं की उड़ान जल्दी ही कहानियों तक ले आई । दोस्तों ने प्रेरित किया और पहला कहानी संग्रह परछाइयों के उजाले आया जिसे बहुत प्रशंसा मिली । इसके बाद आया उपन्यास छूटी गलियाँ जो अब मातृभारती पर भी उपलब्ध है । एक अन्य कहानी संग्रह कछु अकथ कहानी की कुछ कहानियाँ भी आप मातृभारती पर पढ़ सकते हैं । शीघ्र ही एक साझा उपन्यास देह की दहलीज पर लेकर आ रही हूँ मातृभारती पर ।

डिनर के बाद किचन समेटकर वह अपने कमरे में आ गई थी। बच्चे अपने-अपने कमरों में चले गए थे मुकुल ड्राइंग रूम में टीवी देख रहे थे सासु माँ बेटे के साथ बैठने का सुख लेने के लिए इंग्लिश न्यूज़ चैनल की गिटर पिटर में भी हाथ में माला लिए बैठी थीं। कामिनी ने दिन भर की थकान को शॉवर में धो डाला। गीले बालों को टॉवल में लपेटे लेस की नीबू पीली नाइटी पहने वह आईने के सामने खड़ी हुई तो खुद के रूप पर मोहित हो गई। गोरा चंपई रंग बड़ी बड़ी आंखें थोड़ी छोटी लेकिन तीखी नाक भरे भरे होंठ जो दबे छुपे शरीर में उठने वाली हर लहर पर लरजते हैं सुतवां लंबी गर्दन और भरे भरे वक्षों के बीच गहरी रेखा में ऊँगली फेरते वह गर्व से भर गई थी। "बहुत खूबसूरत हो तुम क्या किसी को इतना सुंदर होना चाहिए ?" उसने आईने में नजर आने वाली गहरी  काली आँखों में झांकते हुए पूछा था और कोई जवाब न पाकर अपने बालों को टॉवल से आजाद कर गर्दन झटकते हुए पीछे पीठ पर फेंका था। दो-तीन अल्हड़ लटें दूसरी ओर से घूम कर उसके चेहरे को चूमने लगी थीं और उनके ऐसा करते ही चेहरे की लुनाई और बढ़ गई थी। देर तक कामिनी खुद को निहारती रही हाथों में क्रीम मलते पैरों को सहलाते कभी झुकते कभी मुड़ते शरीर पर बनने वाली रेखाओं को देखते वह मुकुल के कमरे में आने का बेसब्री से इंतजार करने लगी। 
Kavita Verma लिखित उपन्यास "देह की दहलीज पर" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/novels/16686/deh-ki-dahleez-par-by-kavita-verma

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Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 20 - अंतिम भाग" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19887916/deh-ki-dahleez-par-20-last-part

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Kavita Verma लिखित उपन्यास "छूटी गलियाँ" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/novels/5199/chooti-galiya-by-kavita-verma

7 मई 2020 से 20 जून 2020 तक पाँच लेखिकाओं और बीस कडियों के उपन्यास देह की दहलीज पर का सफर समाप्त हुआ।
बीस कड़ियों में रिश्तों की कशमकश का यह अंजाम आपको कैसा लगा अपनी प्रतिक्रियाओं से जरूर अवगत करवाएं। आप मुझे प्रायवेट मैसेज में अपनी भावनाएँ और उपन्यास की पाठकीय प्रतिक्रिया और समीक्षा भी लिख कर भेज सकते हैं। जिन पाठकों ने शुरू से अंत तक इस सफर में हमारा साथ निभाया उनके ह्रदय से आभारी हैं। जो बीच में से जुड़े या बीच में किसी कारण वश छूट गये वे समय निकाल कर इसे पूरा पढ़ेंगे तो अच्छा लगेगा ।दहलीज टीम को आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा। हमें इतना स्नेह देने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 20 - अंतिम भाग" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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कामिनी को अपने संबंधों को देखने की एक नई दृष्टि मिली है। नीलम ठीक है और अरोरा अंकल भी यह राहत भरी बात है। देखना यह है कि अब कामिनी अपने संबंधों को कौन सी दिशा देती है? जानने के लिए पढ़ें उपन्यास

Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 19" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19887708/deh-ki-dahleez-par-19

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Kavita Verma लिखित उपन्यास "देह की दहलीज पर" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/novels/16686/deh-ki-dahleez-par-by-kavita-verma

कहानी अपने अंजाम की ओर। क्या हुआ कामिनी और मुकुल के बीच दूरी का? क्या वे करीब आये या और दूर हो गये? नीलम के आपरेशन के बाद क्या कैसी हो गई उनकी जिंदगी? अरोरा दंपत्ति के जीवन में क्या मोड़ आया? सुयोग को दी गई सलाह पर क्या अमल किया गया? शालिनी की कशमकश खत्म हुई या नहीं?
जानने के लिए पढ़ें उपन्यास देह की दहलीज पर

Kavita Verma लिखित उपन्यास "देह की दहलीज पर" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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Kavita Verma लिखित उपन्यास "छूटी गलियाँ" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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अरोरा अंकल की तबीयत खराब होना कलेजा धक कर गया ।सुयोग को जो सलाह मिली वह सभी युवाओं के लिए आई ओपनर है। कामिनी और मुकुल के बीच दूरी क्यों बढ़ रही है और इसका क्या परिणाम होगा यह चिंता का विषय है। सभी पात्रों को लेकर एक दिशा दिखाती कड़ी पढिये ।
Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 18" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19887395/deh-ki-dahleez-par-18

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