After Rising MySelf, Be Helpful to More and More People.

હું તૂટેલા કાચના ટુકડાની જેમ વીખરાઈ છું,
હવે તું, મને સમેટી નહીં શકે.

-Krishna

"न कंचित् शाश्वतम्" अर्थात् कुछ भी स्थायी नहीं है।

Krishna Timbadiya લિખિત વાર્તા "પ્યારે પંડિત - 20" માતૃભારતી પર ફ્રી માં વાંચો
https://www.matrubharti.com/book/19922488/dear-pandit-20

मैंने देना सीखा, इसलिए नहीं कि मेरे पास बहुत है. बल्कि इसलिये कि मुझे मालूम है खाली पेट, खाली हाथ होने पर कैसा महसूस होता है

Read More

बेवजह दिल पे कोई बोझ न भारी रखिए, ज़िंदगी जंग है इस जंग को जारी रखिए।

मैं 'मनुष्य के लिए राजनीति' में विश्वास करता हूँ, 'राजनीति के लिए मनुष्य' में नहीं।

नए साल में कोई संकल्प करने की आवश्यकता नही है, क्योंकि... अब अपनी कोई बिगड़ने की उम्र तो रही नहीं. और... सुधरने की तो बिल्कुल ही नहीं

Read More

हर दिन एक नया अवसर है. और जो अवसर को सफलता में बदलते हैं, जीत उन्हीं की होती है. बुलंदियाँ वही हासिल करते हैं.

Read More

તમારી નજરે હું નજરાણું બનીને આવીશ,
તમે મહેસૂસ તો કરો, હું અહેસાસ બનીને આવીશ.

धूप खुल कर भी कुछ नहीं कहती, रात ढलती नहीं, थम जाती है.
सर्द मौसम में बड़ी दिक़्क़तें हैं, यादें तक जम के बैठ जाती हैं..!

Read More