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दास्तान सुना रही थी वो पगली अपने किस्सों की,
हम भी महफ़िल में सामिल हो गए।
उसके हर एक अल्फ़ाज़ के साथ हम खुद को गुनहगार ठहरा जा रहे थे,
भरी महफ़िल में लगा जैसे सिर्फ हम ही सजा- ए - मौत के हकदार हो गए।।

Kru...📝❤️

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यूं ही हसी मजाक में गैइर केह कर,
हमने इश्क़ के उसुल पे खड़े रहने की बात कर ली।।
उस नादान ने हाथ उठाएं और आंखें बंद कर दी।
अपनी हर सांस मेरे नाम कर खुद की सांस नीलाम कर ली।।

Kru...📝

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बड़ी सिद्दत से पिरोया था हर लम्हा,
हसी-ऐ-महोब्बत का।
बिखर के रह गया वक़्त हमारा,
मलाल रहा तो सिर्फ एकदूसरे पे इल्ज़ाम का।।

kru...📝

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ये पानी की बूंदे भी आज अजीब शरारत के मूड में लग रही हैं,

खुद बेशरम बन अपनी हर एक लहर के साथ तेरी यादों की तलब लगा जाती हैं।

kru...📝

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आंसूओं ने नजाने आज कैसा फरेबी याराना दिखाया है,
लगता है दिल के बाज़ार में कोई पुराना सौदा मुकद्दर करने आया है।
वक़्त की कशमकश में ये नादान-ऐ-दिल किसी पे हक जताने लगा है,
लगता है हमारा पुराना सौदेदार , दर पे फिर बिकने के लिए आया है।।

Kru...📝

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घुरूर है हमें हमारी महोब्बत पे,
की वो अजनबीओ के सामने,
अपने चेहरे पे पडदा गिरा देती है।

तारीफ़ भी क्यू ना करे हमारे मेहबूब की,
इस वफा-ऐ-इश्क़ में सभ्य बन,
वो हमारे इश्क़ को कुछ अलग सा ही नाम देती है।

kru...📝

#सभ्य

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#बेवकूफ

बदनाम हो कर तेरे इश्क़ में,
पाकीज़ा इश्क़ की दास्तान सुनाएंगे।
चाहे बेवकूफ़ कहे जमाना हमे,
हम भी महोब्बत का महेल सजाएंगे।।

kru...📝

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ऐ दिल तु क्यों यूं ढल रहा हैं,
लगता हैं जैसे ख्वाहिशों का आशियां जल रहा है।
प्यार था या धोखा ये भी ना जाना ये गुस्ताख,
अब तन्हा बन क्यूं धीरे धीरे पीगल रहा है।

kru...📝

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सिलसिला-ए- मुलाकात में,
शाम-ए-सौहरत का किस्सा हसीन बन गया।
हम पे इश्क़ का रंग चढ़ा के ,
वो अब किसी और के आंखों का नूर बन गया।।
kru...📝

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