Read My Story ... full of Fun and Humour "पहला घूँट" and please give your reviews

बादलों का छाना
बूँदों का
बरस पड़ना
सामान्य सा
मौसमी बदलाव

किन्तु मेरी
सामान्य सी चाह
इतनी बड़ी
क्यों लगती है-

जब पहले
बादल घुमड़ें
पहली बूँदे पड़ें
पहली बार
मिट्टी भीगे तो
मैं भी भीगूँ
साथ तुम्हारे
और मुझसे उठी
सोंधी महक
तुम महसूस करो

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बादलों की मटरगश्ती और नम हवाओं की आवारगी में एक कलाम हो जाये

ऑनलाइन तुम भी मैं भी ... चाय हो और इनबॉक्स पर दुआ सलाम हो जाये

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ये बारिशें भी तुम सी हैं

जो बरस गई तो बहार हैं
जो ठहर गई तो क़रार हैं

कभी आ गई यूँ ही बे सबब
कभी छा गईं यूँ ही रोज़ ओ शब

कभी शोर हैं कभी गुम सी हैं
ये बारिशें भी तुम सी हैं !

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मेघों से गिरे
कूपों में बसे

झरनों से झरे
गंगा में बहे

कितना भी
साफ़ हो पानी
तुम्हारे प्रेम सा
नहीं होगा-

देखो तो कैसा
चमक गया हूँ
तुम से धुल कर

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पता है तुम्हें मेरे स्वप्न
क्यों विलक्षण हैं ?

उन्हें मेरे अतिरिक्त
कोई नहीं देखता,
तुम भी नहीं
और उन में
तुम्हारे अतिरिक्त
कोई नहीं होता,
मैं भी नहीं

किंतु वे सदैव
सम्पूर्ण रहे हैं
मेरे इस अपूर्ण
जीवन में तुम्हारे
चिर अभाव में

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ख्वाबों का
रंगीन होना ही गुनाह है
इंसान का
ज़हीन होना ही गुनाह है...

कायरता समझते हैं लोग
मधुरता को
ज़ुबान का
शालीन होना ही गुनाह है...

खुद की ही
लग जाती है नज़र
हसरतों का
हसीन होना ही गुनाह है...

लोग इस्तेमाल करते हैं
नमक की तरह
आंसुओं का
नमकीन होना ही गुनाह है...

दुश्मनी हो जाती है
मुफ्त में सैंकड़ों से
इंसान का
बेहतरीन होना ही गुनाह है.....

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खुशियों का कोई रास्ता नहीं,
खुश रहना ही रास्ता है!