अपनी ढ़ेर सारी गलतियों से बचा हुआ व्यक्ति हूं। अगर वह गलती उस वर्तमान में होती तो यह जीवन वैसा ना होता, जैसा आज है। इस मायनों में हमेशा बचा हुआ व्यक्ति रहूंगा'।

लॉकडाउन से एक दिन पहले की तैयारी मुझे बचपन में पिट्टुल खेल की तरह लगी। आज लगा मानो लॉकडाउन वही गेंद है, जिससे बचने के लिए हम जल्दी-जल्दी बिखरे पत्थर ज़माने की तरह घर में आवश्यकता के राशन जमा कर रहे हैं। ताकि इस लॉकडाउन की गेंद से हम बच सके। दो दिनों तक पूरा शहर यह खेल-खेलता रहा। जिन लोग ने सही समय में अपने हिस्से के पत्थर जमा लिए अब वो घर में निश्चिंत बैठे होंगे। जो रात 9 बजे के बाद दुकान पहुंचे होंगे समझो वह पत्थर जमा ही (राशन खरीद) रहे थे कि लॉकडाउन कि गेंद उन्हें लग गई। अब वही व्यक्ति लॉकडाउन में अपने पत्थर ज़माने घर-घर भटकने वाला है। बचपन से यह खेल मेरा प्रिय रहा है। इसलिए गाड़ी में पैट्रोल, खाने की आवश्यक चीज़े खरीदकर शाम 4 बजे रूम लौटा । लॉकडाउन की गेंद मुझसे काफी दूर थी। मैं फिर से यह खेल बिना भय के जीत चूका था। तुरंत किचन में एक कप कॉफ़ी बनाने के बाद बालकनी से लोगों को किराना दुकान में अपने पत्थर जमाते देखने लगा ।वहां काफ़ी भीड़ थी।🌸♥️
शुभ लॉकडाउन 🙏

Read More

मृत्यु के करीब
-अब उम्मीद छोड़कर जी रहा हूं। एक सत्य जो मुझे लंबे समय से ज्ञात था। वह करीब आना शुरू कर दिया है। मैंने सालों पहले लिखा था मेरी मौत हिर्दय गति रुकने से होंगी अब वर्तमान में मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी है। कितनी समस्या है इस वर्तमान में यह इनदिनों ज्ञात हाे रहा है। मृत्यु के पहले मुबंई के जूहू सिल्वर बिच में उस कोने में बैठना चाहता हूं। उन जगह में कुछ समय और बिताना चाहता हूं, जिसमें मेरा अंतित लंबे समय तक जुड़ा है। एक इच्छा और है की मेरी अस्थीया वही प्रवाहित किया जाए। मुझे वह जगह प्रिय है। एक खूबसूरत प्रेम मैंने उस जगह में महसुस किया है। भले वह वर्तमान में नहीं। इस बात का मुझे बिलकुल भी मलाल नहीं। मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता। नियति को कोई ठूकरा नहीं सकता है। मेरी मृत्यु शायद इतने जल्दी नहीं लेकिन हाेगी तो हृदयाघात से। कल रात से सांस लेनी की हाे रहीं। समस्या दाेस्तों को साझा करने के बाद घर वालों को बता चुका हूं। वर्तमान हालात इतने खराब नहीं है।
मैंने अपना खुबसूरत वर्तमान उस दिन ही त्याग डाला जब मैंने पुराना रूम छोड़ने का फैसला लिया था। नए मकान में आने के बाद सारा कुछ भुलने लगा हूं। कैसे सुबह और शाम का जीवन होता है। इस वक्त बार-बार इच्छा हो रही। मुझे अंजली से बात करनी चाहिए। लेकिन एक क्रोध आज भी जीवित है, जो अपनी जगह बिलकुल सहीं है। मैं जल्द ठीक हो जाउंगा यह मुझे मालुम है। थोड़ा समय लगेगा लेकिन पहले के तरह वर्तमान को वही प्यार देना चाहता हूं।

मुझे अपने परिवार से बेहद प्यार है.यह खूबसूरत वर्तमान को जीने की और इच्छा. अब सब नियति पर है.

Read More

बचपन से किसी घने मेले में गुम जाना चाहता था। कई बार हाथ छोड़कर भीड़ में शामिल होने का प्रयास भी किया लेकिन हर बार गुम जाने के ठीक पहले पकड़ा गया। गुम जाने की वजह एक नया रास्ता खोज निकाले की थी, जो सीधा मुझे भीड़ से दूर कर दे और ऐसी जगह में पहुंचा दे जो बिलकुल नए जीवन के रास्ते में चलने जैसा हो। तभी से हर पल मुझे जीवन में बदलाव लाना आकर्षित करता है। इसलिए एक जीवन को कभी लंबे समय तक नहीं जी सका। अपने जीवन में हमेंशा जगह छोड़ते हुए चलता हूं। ताकि छुटी हुई जगह में एक नया जीवन फिर आ सके और वह समय पहले के तरह ना लगे. 🌸🌿

Read More

बहुत पहले मैंने किसी से झूठ कहा था की मैं वर्तमान अपनी इच्छा अनुसार जी रहा हूं. जो असल में एक झूठी कल्पना थी. उस वक्त कतई वर्तमान को अपने अनुसार नहीं जी रहा था. मैंने तय किया यह झूठ एक समय बाद सच होना चाहिए. ढेरों बदलाव के बाद आज अपनी झूठी कल्पना के सत्य में वर्तमान जी रहा हूं. सच कहूं तो मेरे सपने एक झूठी कल्पना जैसे है, जिसे अक्सर लोगों से कहता हूं लेकिन बहुत समय बाद उसे सत्य में बदलकर एक कप कॉफ़ी के साथ एकांत में उत्सव मानते हुए खुद को पाता हूं. मुझे लगता है, हमें अपने बनाए हुए जीवन में रहना चाहिए फिर वह अभाव में हो या फिर प्रभाव में. वह हर पल जीवित खुशी ही देगा. 🌸♥️

Read More

रूम की दीवार का खिड़की के बाहर आसमान से गहरा संबध है। यह बात मुझे बहुत समय बाद पता चली । इस रूम में मुझसे पहले भी कोई रहता था। शायद उसने रूम के भीतर चुप्पी साधे जीवन को कभी नहीं देखा होगा। जो मैंने गहन एकांत को खिड़की से आती शाम की रोशनी में देखा है। रूप की दीवार और खिड़की से मेरा संबध अब मध्य है। इसमें एकांत एक संवाद के रूप में शामिल है। जब पहली बार किसी ने रूम की खिड़की को खोला होगा। उस दिन शाम दिन के चले जाने से पहले पेड़ के पत्तियों से होते हुए रूम में प्रवेश किया होगा और दाेनो की पहली मित्रता हुई होगी। हर शाम से पहले खिड़की का खुलना और शाम के खत्म होने के बाद दरवाजा बंद कर देना उस संबध की मधूरता को बढ़ा दिया होगा। रूम में रहते हुए कई महीनों बाद मैंने दीवार पर खिड़की से आती रोशनी को देखा था. दोनाें के सवांद को कान लगाकर सुनने लगा। उस दिन मैंने रूम में अपने निजी एकांत की आवाज को महसुस किया, जिसे अपने पुराने रूम में छोड़ आया था। पहले एक स्वार्थ से शाम को खिड़की खोलता की मुझे रोशनी में एकांत नजर आएगा। लेकिन बाद में यह जीवन का हिस्सा बन गया। अब 4 बजते ही सभी शाम का इंतजार करते है। जब कभी आसमान में बादल होते। हम रूम में शाम की रोशने के वियोग में समा जाते है। जब रोशनी रूम में होती है हम सभी उत्सव मनाते है। हम में रूम, एकांत, खिड़की और मैं शामिल होते है। जब भी रूम पर लिखता हूं। आने वाली शाम में उसे पढ़कर सुनाता हूं। इसमें अकेला नहीं होता. हम सब शामिल होते है। 🌸

Read More

लंबे वक्त तक बात नहीं करने से हमारे बीच में काफी जगह हमेशा से खाली रहीं है। प्रेम, वियोग, अतीत में हुई गलतियां यह सभी खाली जगह महीनों बाद दोनों अपने किसी निजी संवादों से इसे भरने की कोशिश करते हैं। उस वक्त लगता है मानों उस संबध को पुरानी घड़ी की तरह किसी ने झंझोड़ दिया होगा, जिससे वह फिर चलने लगी है l दोनों के संवाद अतीत के "था" शब्दों को वर्तमान के "हाँ" में बदल देता है। दोनों के बीच कब सारी जगह संवादों से भर जाती है। इसका आंकलन नहीं किया जा सकता। एक दिन का संवाद महीनों की खाली पड़ी हुई जगह भर देता है। हमेशा कोशिश करता हूं वह संवाद मेरे वर्तमान में बना रहें। लेकिन हर बार वह खेल बनकर रह जाता है। जब संवाद अतीत से होकर उन गलतियों के बीच पहुंचता है, जिसे वर्तमान में ठीक नहीं किया जा सकता। तब वह संवाद अपने अंतिम समय में होता है। वह खेल हारने के बाद भी मैं उस खेल में बना रहता हूं। खुद को कोसता हूं। महीनों तक संवाद नहीं होने से खाली जगह पर एंकात ने अपना घर बना लिया था। जब दोनों के निजी संवाद उस जगह को भरने लगते है, तब जीवन का सारा एकांत भंग हो जाता है। शायद एकांत ने मुझे बिना कहें आत्महत्या का फैसल लिया होगा. मैं हमेशा से छुटे हुए संबधों के शक्ल के व्यक्ति को एकांत कहता हूं। लेकिन कभी उन शक्ल के व्यक्ति को अपने एकांत में लाना नहीं चाहता था. खैर..🌸♥️

Read More

शाम से मेरी खास मित्रता है, जो दिनभर अपने व्यस्तम कार्यों में रहने के बाद अंतिम समय में साथ होती है। कमरे के भीतर। उसके आने से पहले खुद को पूरी तरह से तैयार कर चुका होता हूॅ। केवल आईना देखना बचा रह जाता है। पांच बजते ही शाम कमरे में आती है। वह अकेली नहीं आती अपने साथ रोशनी के रूप में एक आईना भी साथ लाती है, जिसे कमरे के एक हिस्से में देखा जा सकता है। उस आईने में शाम खुद को पूरा देखने के प्रयास में हमेंशा असफल रहती है। लेकिन मैं उसकी अधुरी छाया में हर रोज खुद को पूरा देख लेता हूं। उस वक्त आईने में कतई अकेला नहीं होता. शाम भी साथ होती है। जैसे यह तस्वीर मेरी अकेली की नहीं, एक शाम भी इसमें शामिल है। जो मेरे जाने के बाद कमरें के अंधेरे में समा चुकी होगी। खैर..

Read More

बीमारी क्या है? भीतर की अवस्था। जो समय के साथ बनती बिगड़ती रहती है।

कुछ अच्छे गाने तो टिक-टाक वालों ने खराब कर रखे है. उन गानों को सुनने पर शब्दों से सुकून गायब है, उसकी जगह बेहूदा डांस नजर आते है.

Read More

बारिश के मौसम में अब आम गर्मी के यादों में बिक रहे है.