मैं लक्ष्मी नारायण 'पन्ना', बचपन से ही कहानी और कविताओं में रुचि थी परन्तु साहित्य से कोई लगाव नही रहा, कारण कि इस क्षेत्र में जानकारी का अभाव और विषय की भिन्नता। लखनऊ शहर की आबो हवा और लखनऊ विश्वविद्द्यालय से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर कराने के पश्चात बेरोजगरी के दंस ने ज़िन्दगी के कई पहलुओं से रूबरू करा दिया, जो मेरे लेखन को धार दे गया।शुरुआत में बिना किसी जानकारी के शेरो शायरी और लघु कविताओं को लिखना शुरू किया।मुझे अपने लेखन के लिए प्रकाशक और समीक्षक की तलाश थी । प्रकाशक की तलाश तो मातृभारत

#ग़ज़ल
आग लगा कर जायेगी
वज़्न:- 2222 21122 222

मेरी कविता, कैसे उनको भायेगी।
दिल टूटा है, आग लगाकर जायेगी ।।

मरहम उनके दर्द का, केवल इतना है।
मतवाली ही, प्यास बुझा कर जायेगी।।

कहता हूँ फिर भी, छोड़ो रोना धोना।
सूखा है, कल फिर हरियाली आयेगी।।

क़समें, रश्में, रीत, रिवाजें, छोड़ो भी।
उल्फ़त की बस, प्रीत निभाई जायेगी।।

शायर दिल का, मज़हब कोई क्या जाने।
तोहमत उस पर, रोज लगाई जायेगी।।

-Panna

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शायर दिल का, मज़हब कोई, क्या जाने।
तोहमत, उस पर, रोज लगाई जायेगी।।

-Lakshmi Narayan Panna

रोज के उनके, बहाने, यार हैं ।
दर्द है, तकलीफ़ है, बीमार हैं ।।

-Lakshmi Narayan Panna

#ग़ज़ल
#मेरे_अल्फ़ाज़_बन_जाओ
वज्न-2122. 2122. 2122. 2

लग के होंठों से मेरे अल्फ़ाज़ बन जाओ।
तुम मेरी धड़कन कि एक आवाज़ बन जाओ ।।

जुम्बिश-ए-हुस्न-ए-नज़र बनकर बहर निकले।
तुम ग़ज़ल का इक नया अन्दाज़ बन जाओ।।

भूल जानें को जुटी हैं ख़्वाहिशें मुझको।
तुम ही मेरी आरजू तुम आज़ बन जाओ।।

जल मरे सारा जमाना अपनी उल्फ़त पे।
तुम ही मेरी हर खुशी हमराज़ बन जाओ ।।

#Panna

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https://youtu.be/j3jZzj5wCQU

Hindi poem exploring the backstory of laborers, their courage, patience and Social problems.
-Panna

#Republicday
वतन के नाम पर हम साज़िशें हरगिज़ नही करते।
हमें अपने वतन से कम स कम इतनी मोहब्बत है।।

आबरू लुटती रही, और तू बैठा रहा ।
वाह रब मर्जी तेरी, वाह तेरी बेबसी ।।
-WriterPanna
#rapecase #socialevils #अन्यायकेविरुद्ध #अन्याय #शोषण

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आज भी एक अफ़साना है वह,
प्यार भरा नज़राना है वह ।।
याद मिटा ना पाया पन्ना,
आज भी एक दीवाना है वह।।
-Panna
#LoveShayari

-Lakshmi Narayan Panna

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जानत हौ का उल्लू का, रातिउ नही देखात।
जतने मनइ उल्लू हैं, उनहुक कहाँ सुझात ।
-Panna
#अवधी_दोहा

-Lakshmi Narayan Panna

बस तसब्बुर न था , अपना वादा थ यह ,
दिल से दिल में उतरना न छोड़ेंगे हम ।

जिस्म से जान रुखसत भि होगी नही ,
बिन कहे उनसे मुँह कैसे मोड़ेंगे हम ।।
-Panna
#Loveshayari #Loveqoute

-Lakshmi Narayan Panna

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