जो प्राप्त है वही पर्याप्त है ****************************** कभी शब्दों में तलाश ना करना वजूद मेरा दोस्तों. मैं उतना लिख बोल नहीं पाता, जितना महसूस करता हूँ!! My contact & whatsapp no. +91 9685485716 Don't follow to unfollow Join instagram Prinshu_lokesh_tiwari आधुनिक भारतीय लेख कला Con. My whatsapp https://chat.whatsapp.com/BWk4ZdHGKzC5MyR58AFMXA

#माँ #प्रिन्शु_लोकेश
*_________माँ_________*
आज माँ पर कुछ लिखने जा रहा हूँ।
अपनी घिनौनी औकात दिखाने जा रहा हूँ।

हमें लगता नहीं माँ पर कुछ लिखा जाता है।
माँ से तो केवल हर पल सिखा जाता है।

पर क्या करूँ बहुत मजबूर हूँ।
अपनी माँ से कोशों कोश दूर हूँ।

जब सच्ची मोहब्बत की जुस्तजू होती है।
उस दिन घंटो माँ से गुफ्तगू होती है।

माँ ही पहली मोहब्बत है मेरी।
उसकी दुआ से ही तो बरकत है मेरी।

उसके हाथों का निवाला कितना लजी़ज होता है।
सूखी रोटी के आगे सब खाना बत्तमीज होता है।

माँ शब्द जब आते है अल्फाज में।
चार चांद लग जाते है मिजाज में।

कुछ लोग गलियों में माँ का नाम लेते है
फिर भी कम से कम माँ का नाम लेते है।

आग को कैसे भी छुओं जलाएगी ही।
माँ कैसे भी बोलो जिंदगी तर जाएगी ही।

माँ का मतलब केवल माँ है।
हमें पता नहीं माँ तू क्या है।
#prinshulokesh

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#गजल #प्रिन्शु_लोकेश
________________________________
बड़े नमाज़ी बनते हो मस्जिद भी जाया करो।
क्या लिफ़ाफिया में हो कुछ तो नुमायां करो।

तल्खिया बहुत है आजकल जुवां पे तुम्हारे
एक काम करो घर में बैठे गुड़ ही खाया करो।

दुसरो से सुनने मे आया इश्क़ दूसरा हो गया तुम्हें
यार कभी तो तुम भी ताज़ी खबर सुनाया करो।

हमें ठुकरा गये हो कि मजहब नहीं मिलता
यार जात से नहीं अहल-ए-वतन बुलाया करो।

इसीलिए हमने भी नहीं रखी दावत-ए-वलीमा
जाओ जिस्म बेच बेचकर खूब कमाया करो।

बुरा तो बहुत लगा होगा तुम्हें पर झूठ कैसे बोलूं
झूठ ही सुनना हो तो अदालत में आया करो।
#prinshulokesh

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#kavyotsav2
*~~~~~~~~~~~~~~~*
दिल को कई बार समझाया
किन्तु उवाल भी जायज थी।
गुस्सा होना फितरत मे नहीं
पर वो मिसाल भी जायज थी।।

यूं अचानक विमुख हो जाना
शायद मेरा ही दुर्भाग्य रहा हो
पर तुम्हीं बताओ मेरे प्यारे
क्या मेरी बात नाजायज़ थी।।

रूठ जाओ या भाड़ मे जाओ
अब हम क़जा नहीं गाएगे
कितनी बार तुम्हें समझाया
पर कोकिल नहीं तुम वायस थी।।

तेरे कड़वे शब्द ने मुझको
कुछ ऐसे छल्ली कर डारे
पर छल्ली करना चुहिया मे
हर हाल मे जायज थी।
*प्रिन्शु लोकेश तिवारी*

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#kavyotsav2
*_______गजल(२)________*
जख्म देने वाले ही आह किये जा रहे।
बिना मुझे समझें वो वाह किये जा रहे।

पुर्सिश-ए-हाल-ए-दिल सरे-राह मत आओ
न चाहने वाले क्यूं मरकज़-ए-निगाह किये जा रहे।

इल्तिज़ा है कि अब ख्वाब मे भी मत आओ
क्यूं रंगीन रात को स्याह किये जा रहे।

हिज़्र मे तो आब-ए-चश्म दरिया-ए-खूं है
उसे बहने दे अब क्यूं राह दिये जा रहे।

तनफ़्फुर सख्त है तनफ़्फुर करने वालों से
पता है इल्म ज्यादा है तभी इम्तिहां किये जा रहे।
*प्रिन्शु लोकेश तिवारी*

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#kavyotsav2
*~~~बेवफाई~~~*
सुनो लड़ाकी रहना दिलदार
कभी नहीं करना झूठा प्यार
बेवफाई हर लेगी।

जो पल मे राजी होती हो।
फिर डर डर के क्यूं रोती हो।
कुछ मां- बाप का ध्यान रखो
जिनके छाओं पर सोती हो।

ये दुनिया है अश्लील।
जो करती बहुत जलील।
बेवफाई हर लेगी।

यहा बस एक ही माया है।
जिस्म जिस्म ही छाया है।
रूह कहाँ यह पता नहीं
सच्चा प्यारा नहीं कोई पाया है।

यहाँ मिलते नहीं गवाह।
बस जीवन रहे तवाह।
बेवफाई हर लेगी।
writerlokesh.blogspot.com

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'''''''''''''''''''ताप तन मे'''''''''''''''''''''
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है प्रखर इक ताप तन मे।
भय नहीं भयपाप जन मे।
मैं नहीं यूं जल रहा
बुझ रही वो आग मन मे।
है प्रखर इक ताप तन मे।
है प्रखर इक ताप तन मे।
उस वक्त़ को न झांक अब तू।
अग्नि है जल माप न तू।
मैं कहूँ या वो कहे
सह नहीं कोई शाप अब तू।
इक इल्म मे कई जुल्म न कर
बन न अरि बाप क्षण मे।
है प्रखर इक ताप तन मे।
है प्रखर इक ताप तन मे।
धड़ कहीं तो सर कहीं।
पर कहाँ वो पर कहीं।
हम परिन्दे वो दरिंदे
धूप मे वो ज्वर कही।
मैं उसका क्या बिगाडू
सूर्यताप है जिसके तन मे।
है प्रखर इक ताप तन मे।
है प्रखर इक ताप तन मे।
*प्रिन्शु लोकेश तिवारी*

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*देश के कल्याण मे हर युवा एक साथ हो*

देश के कल्याण मे हर युवा एक साथ हो।
हर युवा मे देश के सम्मान की ही बात हो।

देश के परिधान को कुछ गीदड़ो ने घेर लिया है।
देश के इतिहास को कुछ लीडरों ने लील लिया है।
वतन के चमन से ही सिसकिया क्यूं आ रही।
हो अगर तुम साथ तो क्यों विरोधी आ रही।

हर युवा का काम है तलवार सब के हाथ हो।
देश के कल्याण मे हर युवा एक साथ हो।

श्वान को कीमा की आदत कभी जाती नहीं।
मूर्खों के सामने इबादत काम आती नहीं।
देश के यौवन हो तुम तुम्हीं कुछ कर सकोगें।
क्लींव शासन रिपुओ से तुम्हीं हो जो लड़ सकोगे।

देश के स्वाधिनता मे सदैव आगे माथ हो।
देश के कल्याण मे हर युवा एक साथ हो।

व्यर्थ मे मत गवाओ उन पुराने नाम को।
सिंह साहब और शेखर जैसे पावन धाम को।
उनके यौवन याद है न,हा! भूल कैसे पाओगे।
मरते दम तक बोल गए अरि अभी भी आओगे।

उनकी खिदमत कर न सके अब तो एक साथ हो।
देश के कल्याण मे हर युवा एक साथ हो।

मैने गर चाह लिया बरदाई गालिब मीर देगे।
साथ तेरा मिल गया जो शत्रु की सीना चीर देगे।
शत्रु मे दम कहाँ पर्वत जवानी तोड़ती है।
मृत्यु से डर कहाँ मृत्यु मुह जवानी मोड़ती है।

हे जवानों आओ एक हाथ मे सब हाथ हो।
देश के कल्याण मे हर युवा एक साथ हो।
*"प्रिन्शु लोकेश"*

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