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વ્યક્તિ અને વાક્યમાં હું અકબંધ છું,

સિગારો મારી જાગીર અને

એકલતા મારી મુમતાઝ છે..
માધવપ્રિયા

एक अकेला इस शहर में,

रात हो या दोपहर मे,

आशियाना ढुंढता है....
માધવપ્રિયા

जहाँ का ताज नहीं,

तुम्हारे दिल पर राज चाहिए,

कल था या कल भले ना हो,

बस थोडी सी तुम्हारे दिलमे हुकूमत चाहिए...

માધવપ્રિયા

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हर तलाश तुम्हें देखकर खतम है,

शायद मंझील यही है बस यही बात है ,

हम राह तकते रहते थे अरसे से ,

शायद उसी इम्तिहान का ये फलसफा है...
માધવપ્રિયા

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रास्ते कहाँ खत्म होते हैं जींदगी के सफरमें,

માધવપ્રિયા

मंझील तो वही है जहाँ ख्वाहिशे थमजाये...

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चलो गुजरती हुई रातको जरा सा थाम ले ,

कुछ तुम कहो कोई गझल हम गा ले ,

तुम अंतरा बताना हम अंतिम छोर तक साथ ले ..
માધવપ્રિયા

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तेरे आने की उम्मीद और भी तड़पाती है..

मेरी खिड़की पे जब शाम उतर आती है..
માધવપ્રિયા