Mahek Parwani is an author, poet , Motivational thoughts Writer and motivational story writer. She has published many motivational and social stories like Sakaratmak vichardhara, Tathastu, The Rainbow , Kaash ! Me Samaj Paata, on online platforms like Kindle amazon ,matrubharti, Story Mirror, etc. Her poem on Amdavad heritage has been published in book called Amdavad Unbound.

ક્યાંથી હોય તારો કોઈ આધાર!
તું તો છે સર્વ જગત નો આધાર.

દરેક યુગ માં છે તને વંદન,
હર કુળનો તારા થકી છે ઉદ્ધાર.


ક્યારેક પિતાનો કુળ
ક્યારેક પતિનો કુળ


ક્યાં શોધે ખુદને?
ક્યાં છે તને કોઈ કિનારા,
તું છે એક પુલ,
તું તો છે હર કીનારા નો આધાર.

મહેક પરવાની

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#दुआ

जिंदगी का सफर सुहाना है,
लगता है जैसे,
किसीकी दुआ का फरमाना है,
तहेदिल से इनका शुक्राना है ।

मिलती रहे सदा हमें,
यही रब से लिखवाना है ।

दुआ में दुआ को मंगवाना है,
और दुआ का पैग़ाम भिजवाना है।

महक परवानी

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#बचपन

इस टूटे तारे से गुजरा वक़्त मांग लु,
इस जवानी से वो बचपन मांग लु ।

वो बिना ताज का राजा बन के,
पिता से जिद्द का हक मांग लु।

वो दिल का तराना गा के,
शरारत करने का हक मांग लु।

वो मां का थप्पड़ खा के,
छुप के हसने का तजुरबा मांग लु।

इस जिंदगानी से बचपन नहीं,
बस,थोड़ासा बचपना मांग लु।

महेक परवानी

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#चिंता
#कबर
#आशियाना
#जिंदादिली

ओढ़े चिंता का कफ़न,
कहां तू सोया निश्चिंत ?

दफनाएं अपनी इच्छाएं ,
बनाएं कबर या आशियाना ?

खोज लेे खुद को,
जिंदा या मुर्दा ?

बस्ती जिंदगी वहां,
जिंदादिली होती जहां।

बनती है हस्ती यहां,
हसरतें होती जहां ।

महेक परवानी

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#मन
#आजाद
#परिंदे
कहीं पे है बंदिशें ,
कहीं पे है रंजिशे।

ऐ मेरे मन तू आजाद होकर भी,
तू आजाद कहां?

आसमान के परिंदे होकर भी,
जमीं पर चुगने की है हसरतें !

कहीं इच्छाओं में कैद है,
कहीं माया का जाल है,
कहीं संतोष का अकाल है ,
कहीं मजबुरियो की बेड़ीआ ।

ऐ मेरे मन तू आजाद होकर भी,
तू आजाद कहां?
महेक पारवानी

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#kavyutsav
#Navratri
#Garba
#Bhakti
#Dandiya

कर जोड़ ,शीश झुका,
कर शक्ति का संचार तु,
मेरी मां,है ऊर्जा का स्रोत।

कर कर विनाश,कर कर विनाश,
कर असुरावृति का विनाश तु
बस,अपने अहम से जीत जा।

भक्ति में लीन, मस्ती में झूम ,
शुंगार में भी सादगी सा सुकून,
गरबा की ताल पर तू घुम ।

आया है पर्व नवरात्रि का,
आया त्योहार है मेरी मां का,
भरती है जोली हम सब की यहां।

जिसने मांगा सच्चे मन से,
पूरी होती मुरादें सबकी यहां
जिसने दिल से बस इतना कहा,
जय अम्बे, जगदंबे मां ।

महेक परवानी

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