ओएनजीसी में कार्य किया। कुमायूँ विश्वविद्यालय नैनीताल(डीएसबी,महाविद्यालय नैनीताल) से शिक्षा प्राप्त की।विद्यालय शिक्षा-खजुरानी,जालली,जौरासी और राजकीय इण्टर कालेज अल्मोड़ा में। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित। 7 काव्य संग्रह प्रकाशित। बचपन में गाँव का जीवन जिया और खूब उल्लास से।पहाड़ के गाँव के सभी काम करते थे।

अब बीच की धुँध हटनी चाहिए
मन का युद्ध मिटना चाहिए
बुद्ध जीवित हों, दिखने चाहिए
आज की धुँध मिटनी चाहिए।

मन और ऊँचा उठना चाहिए
गंगा और पवित्र होनी चाहिए,
हमारी सूरत बदलनी चाहिए
अब शब्द निर्भय होने चाहिए।

कृष्ण खड़े कहीं मिलने चाहिए
दहकता सूरज रहना चाहिए
अंधेरी रात मिटनी चाहिए
अब जीवन की धुँध हटनी चाहिए।

**महेश रौतेला

Read More

हे कृष्ण काम करते-करते
जब हम थक
गहरी नींद की ओर जायेंगे,
तो आपके ही शब्द
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु
कदाचन्" दोहरा
सरल मन:स्थिति में आ जायेंगे।
*******
**महेश रौतेला

Read More

मैंने सुबह की तबियत पूछी
जो जोर जोर से खाँस रही थी,
मैंने दोपहर की तबियत पूछी
जिसे बहुत तेज बुखार था,
मैंने रात की तबियत पूछी
जो जोर जोर से नाच रही थी।

मैं गाने को था पर गा नहीं पा रहा था,
जाने को था पर जा नहीं पा रहा था,
सुनने को था पर सुन नहीं पा रहा था,
देखने को था पर देख नहीं पा रहा था।

ऐसा नहीं था कि हर क्षण ठंडा था
किसी के चेहरे पर मुँहासे थे
तो किसी का चेहरा साफ था।

इतिहास का चेहरा देखा तो
एक ओर खून से लथपथ था,
तो दूसरी ओर शान्त भाव से भरा था।

आगे चला तो देखा सूरज निकल रहा था,
दिन की तबियत सुधर चुकी थी,
गुनगुनी धूप बाहर से भीतर आ रही थी।

*** महेश रौतेला

Read More

मेरे मन में तुम बजते हो
शक्ति रूप में तुम रहते हो,
सत्यार्थ सदा तुम चलते हो
दिव्य स्वरूप में तुम मिलते हो।

कभी तुम्हें मैं शिव कहता हूँ
कभी तुम्हें मैं मन कहता हूँ,
कभी तुम्हारा जप करता हूँ
कभी जग में तप करता हूँ।

त्रिनेत्र हो देख रहे हो
किसी साधना में चुप बैठे हो,
शिव की सबको प्यास जगी है
तुम विष लेकर शान्त बने हो।

**महेश रौतेला

Read More

मेरा जैसा प्यार किसी और ने किया या नहीं
पता नहीं,
जो नदी सा निर्रथक बहता रहा
पर लोग उसे अर्थ देते रहे,
जो समुद्र सा उछलता रहा
पर खारा न हो पाया,
जो  आंखों का कांटा बना 
पर किसी को चुभा नहीं,
जो राहों पर लम्बा चला
पर कहीं पहुंचा नहीं,
जो सिक्के की तरह उछलता रहा
पर हाथ में आया नहीं।

*महेश रौतेला

Read More

ईश्वर के पास

ईश्वर के पास
बहुत बड़ी कहानियाँ नहीं होती
छोटे से आख्यानों में
वह रहता है,
जैसे क्षणभर श्लोकों में
पूजा की पंक्तियों में,
सांसें भर देता है।
वह कुछ देर गरीबी में
कुछ देर खुशी में,
कुछ देर युद्ध में
कुछ देर शान्ति में,
बिता लेता है।
वह हराता भी है
जीताता भी है,
पर अपनी गहराई
किसी से नहीं नपवाता है।
*******
*महेश रौतेला

Read More

इस आसमान में
कुछ लिखा है
जो अमर है,
इस वसन्त में
कुछ नया है
जो अमिट है।
इस आत्मा में
कुछ सत्य है
जो शाश्वत है,
इस समय में
कुछ स्नेह है
जो दैदीप्यमान है।
इस मन में
कुछ करुणा है
जो अटल है,
इस सृष्टि में
कुछ शक्ति है
जो अजेय है।
*****
*** महेश रौतेला

Read More

अँधकार छोड़ दूँ

अँधकार को
यहीं छोड़ दूँ,
साफ आसमान के दिल से
मुट्ठी भर उजाला ले
उसी को बोता जाऊँ,
रोपता जाऊँ,
जनम भर उसी की खेती कर
सबको खिलाता जाऊँ।
******

**महेश रौतेला

Read More

बड़े ध्यान से आती विद्या
विद्यालय में रहती विद्या,
बस्ता बच्चे लेकर आते
बस्ते में रहती विद्या।

कितनी उज्जवल होती विद्या
बहुत धीरज देती विद्या,
पहिचान सबको देने आती
घर -घर जाती अपनी विद्या।

बहुत बड़ी होती विद्या
सुख-दुख अपने पढ़ती विद्या,
गाँव-शहर में रहती विद्या
बड़े जहाज में उड़ती विद्या।

Read More

आत्मा नहीं कहती

चिड़िया नहीं बोलती
अब चहचहाया नहीं जायेगा,
वसन्त नहीं कहता
अब आया नहीं जायेगा,
ठण्ड नहीं बोलती
अब बर्फ नहीं गिरेगी,
नदी नहीं कहती
अब बहा नहीं जायेगा,
फूल नहीं सोचता
अब खिला नहीं जायेगा,
प्यार नहीं कहता
अब भेंट नहीं होगी,
शब्द नहीं कहते
अब गीत नहीं होंगे,
थिरकन नहीं सोचती
अब नाच नहीं होगा,
सुबह नहीं कहती
अब जगना नहीं होगा,
आत्मा नहीं कहती
अब अमरता नहीं होगी,
जीवन नहीं सोचता
अब चलना नहीं होगा।
********
**महेश रौतेला

Read More