my mom is the soul of family.

जिंदगी की सफर जारी हैं
कभी खुशी आ रही हैं,
तो कभी ... जा रही हैं!!

-Maya

आजाद रहिए अपने विचारों से!
पर बंधे रहीऐ अपने संस्कारों से!!

-Maya

लहरों की वजह से

उत काल  की नदी बह रही है
और उसमें दो  दिऐ जल रही हैं,
वो मिलकर कुछ देर बहे
और अलग अलग हो गए

और अलग जब हुए
अपने मर्जी से नहीं हुए

उनके बीच लहरों की
आगमन से दूरी बढ़ी
और लहरों ने उन्हें पटक दिया
अटूट प्रकाश को बिखराव में बदल दिया

जो जल रहे थे एक होकर
हो रही थी दूर तक प्रकाश जल  पर

जब भी आते एक- दूसरे के किनारे
तभी लहरों की होती उजियारे

कभी नदियों की तूफानी
तो कभी बारिशों के पानी
नहीं चाहते हुए भी
बुझ गए
और एक दूसरे से अलग हो गए

-Maya

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जब अपने छोटे छोटे व्खाइशो को जीने लगती नारी।
दुनिया दिखाती है उसे उसकी दायरे सारी।
अपने धरम मे बन्धी नारी, अपने करम मे बन्धी नारी।

अपनो की खूशी के लिये खुद के सपने करती कुरबान नारी।
जब भी सब्र का बाण टूटे तो सब पर भारी नारी।

दिलों में बस जाए वो मोहब्बत हूं।
कभी बहन, कभी ममता की मूरत हूं।

मेरे आंचल में हैं चाद सितारे।
मां के कदमों में बसी एक जन्नत हूं।

हर दर्द-ओ-गम को छुपा लिया सीने में।
लब पे ना आये कभी वो हसरत हूं।

मेरे होने से ही है यह कायनात जवान।
ज़िन्दगी की बेहद हसीं हकीकत हूं।

हर रूप रंग में ढल कर सवर जाऊं।
सब्र की मिसाल, हर रिश्ते की ताकत हूं।

अपने हौसले से तक़दीर को बदल दूं।
सुन ले ऐ दुनिया, हाँ मैं औरत हूँ।

-Maya

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  इश्क हो
तो बता देना

अपनी आंखों से
जता देना

मैं मजबूर हूं
मेरे लव कुछ कहेंगे नहीं

पर तुम थोड़ा सा
मुस्कुरा देना

हम तो कायल हैं
आपके अदा के

आंखों में चमक
और गालों पर लाली

लहराते हुए झुलफे
थोड़ा झटका देना

बेशक खूबसूरत हो तुम
मेरे नजरों से

और खूबसूरत दिल तुम्हारा

हम तो घायल हैं
कोई मरहम हो
तो बता देना

बहुत सी बातें हैं ऐसी
जो बयां नहीं कर सकती

समझदार हो तुम
बस अंदाजा लगा लेना

वक्त मिले कभी
हसी पल सजा देना

एक हसीन ख्वाब हो तुम
मैं नींद में हूं
आज मुझको जगा देना!!

-Maya

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आई सुनाइ एक कथा
दहेज वा एक प्रथा!

सब मां-बाप की एक ही सपना!
हो बेटी का सुंदर वर घर अपना!!

अपने घर भरने के खातिर
दूसरे के घर उजाड़ना
कैसी ऐ बहादुरी है!!


दिन रात पैसे जोड़े बेटी के पिता
हाय राम ऐ दहेज कितनी भारी
दहेजो ने कितने घर उजाड़ी है!!

काली घटा कुछ इस तरह छाई है
व्यापारी ने मनचाहा बोली लगाई है!
देनदारो ने भी बेटी की चाह में
रकम चुकाई हैं!!

पूछा मैंने कि जब दहेज लेना है पाप
फिर यह शादी क्यों कराई हैं?
सब के मुंह से मिला यही जवाब
यह प्रथा पहले से चली आई है!!

चाहे लड़का से लड़की कितने भी हो सुंदर
शिक्षा में हो उससे भी अंबल
पर दहेज ना मिले शादी में
कहा कुछ भी परहेज है!

दहेज अमीरों के लिए शांन ,गरीबों के शाप बन जाता हैं
लाख बचा ले दामन , कहां गरीब बच पाता है!

बन के लाइलाज बीमारी,हर गरीब का घर उजाड़ जाता है!
दहेज के भूख में इंसान भी हैवान बन जाता है!!

कितने भी पढ़ लो,कितने भी बढ लो
बिहार में दहेज अभी भी जारी हैँ!
ई दहेज बहुत बड़ी बीमारी है!!

-माया

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बच्चे बूढ़े सभी चलाएं,
ऐसा रोग जो सभी को भाऐ!!

ऐसे हर किसी का सोशल मीडिया पर हँसी सफर जारी।
कुछ होके भी शादी शुदा बताये खुद को बाल ब्रह्मचारी।।

बच्चे बूढ़े जवान सब सोशल मीडिया पर बिजी।
कोई सिर खुजलाये, कोई दिखाए बत्तीसी।।

तो कलरफुल हुई जिंदगी जो थी ब्लैक एंड वाइट।
बोले व्हाट्सप्प पर मॉर्निंग फेसबुक पे गुड नाईट।।

झोंपड़ी से लेकर महल की परियां यहाँ मिले।
देख देख कर जिनको लोगों का दिल हिले।।

हिला दिया सोशल मीडिया ने इस तरह पूरा जीवन।
सुख पा रहा है यूजर , दुःख झेल रहे परिजन।।

ऐसे यूज़ – मिसयूज कर तूने बदला मेरा इंडिया।
दिल दिमाग अब दोनों लट्टू वाह रे सोशल मीडिया।

-Maya

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तुम चाहो तो गरीबी को बीमार कह लो
तुम चाहो तो पढ़े लिखे को गवार कर लो!!

5 साल की सरकार तुम्हारा
जो चाहो सब काम कर लो!!


छुट्टी का दिन बितने लगा यही पर।
अपने दफ्तर को तुम घर बार कह लो।।

इसी पर मिलने लगी अब हर खबर।
अपने मोबाइल को अखबार कह लो!।

बस बहुत हुआ इस बार
अब कोई  (सरकार)ना कर पाएगा अपना मनमाना कार्य!

इस बार जो रूठे सालों तक हमसे!
वोट ना देंगे हम भी कसम से
सुन ले वोट माँगने से पहले!!

वोट में अटकी जान है तेरी
जाएगी जो कर दी विकास में देरी
सोच समझ लेना आने से पहले!!

आएगी  जब सीट तुम्हारी
जब करोगे कोइ काम हमारी!!

काहे की हम सबको जब करोगे बीमार
तब तोहरो ना चल पाइ कउनो  सरकार

-Maya

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लड़की माल नहीं ,मान होती हैं
लड़कियां सामान नही,सम्मान होती हैं!

इज्जत किया करो लड़कियों का
क्या फर्क पड़ता है

तुम्हारे घर की हो या गैरों की होती हैं!

जिस दिन ये नयी सोच, 

हम अपने ज़हन में उतारने लगेंगे,

ये हर दिन होने वाले, बलात्कार, 

छेड़छाड़ सब बन्द होने लगेंगे,


कपड़े छोटे मत पहनो,

ये सोच हमारी छोटी है,

जिस दिन ये बड़ी घूरती नज़रें,

कपड़ों से हटकर कुछ देखेंगी,

हर वो मासूम लड़की में,

अपनी माँ, बहन, बेटी तुमको दिखेगी, 


हर पुरूष की चाह

कि सुन्दर लड़की का साथ मिले,

फिर सुन्दरता को क्यों,

कपड़ों में तलाशता फिर रहा तू,

सोच ही तेरी तुच्छ है,
कपड़ों को तू दोष न दे,

कपड़े तो स्त्री का श्रंगार है,
उसको तू बदनाम न कर,

सोच को तू बदल के देख,
देखने का नजरिया बदल के देख,

कपड़ों से कुछ नहीं होता है,
गिरती सोच का नतीजा होता है,

कुंठित मानसिकता भगानी है,
एक नयी विकसित सोच जगानी है। 

-maya

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खुद की तलाश

बहुत ढूँढा पर खोज ना पाया मैं खुद को जहानो में
समझ आया है के मैं माँ बाप की रूह में निवास कर रहा हूँ

गिर चुके हैं लोग अपने मेरे नजरों से
कुछ मत कहो, मैं खुद ही इसका अहसास कर रहा हूँ

गया है कल कोई इस दुनिया से खाली हाथ,जाने कहां
फिर क्यूँ अ भगवान मैं खुद को इतना बदहवाश कर रहा हु

सुन नी हैं तो  सुन ले  कुछ लफ्ज़ मेरे अपने
बेवजह,बिन कारण मैं खुद को जिन्दा लाश कर रहा हूँ...

आती है किस्मत तो चली आ मेरी पनाहों में आज अभी
मैं मौत से पहले की धड़ी अब आभास कर रहा हूँ

आजकल एक काम ये अनोखा खास कर रहा हूं
मैं खुद में खुद की ही हर पल तलाश कर रहा हूँ

-Maya

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