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શરદ પુનમ

Monsoon welcome

जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां [2]

रुई की तरह उड़ जाएँगे

हम महकूमों[3] के पाँव तले

ये धरती धड़-धड़ धड़केगी

और अहल-ए-हकम[4] के सर ऊपर

जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी





29

Sep

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