Mujhe Novel padhna bhut pasand hai. Shayad yahi wajah hai ki mera ye shauk mujhe kuch naa kuch likhne ko inspire karta rehta hai.

खिड़की से झांकती आँखें
हमेशा कुछ ना कुछ ढूँढती है
किसी अपने को या खुद को

चाय लवर हो या कॉफ़ी लवर........
मिठास के लिए चीनी जरूरी है..........

"ये उन दिनों की बात है - 23" by Misha read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19913666/its-matter-of-those-days-23

ये तो कसूर था निग़ाहों का.......
ना तुम्हे पता था न मुझे......

-Misha

वो तेरे साथ होने का एहसास
पल पल याद आता है मुझे

यहीं दुआ है हमारी.........
तुम्हे मिले खुशियां जहां भर की..........

कहना है तुमसे ये,
पर कैसे कहूँ तुमसे ये मैं,
की तुमसे ही प्यार करती हूँ मैं........

कभी ना कभी तो.............
कहीं ना कहीं तो...........
किसी ना किसी से तो...........
दिल लगाना ही पड़ता है............

तेरी राह तकती मैं खामोश सी.........
पर आँखें बोलती सी........

यादें पीछा करती है.......
इस कदर कि........
उन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता.......