मुझे नॉवेल पढ़ना बहुत पसंद है. शायद यही वजह है की मेरा ये शौक मुझे कुछ ना कुछ लिखने को इंस्पायर करता रहता है . insta handle @writings_of_mi

साया बनकर साथ चलेंगे
इसके भरोसे मत रहना
अपने हमेशा अपने रहेंगे
इसके भरोसे मत रहना

-Misha

हम जो सोचते है
हम जो चाहते है
वो जिंदगी हमें कभी देती नहीं
ये उसूल है जिंदगी का साहब

-Misha

इंतजार में बैठे हैं उसके
जिसको कभी आना ही नहीं होता

कोई तो हो जो मुझे हर गम से बचाए
कहे मुझसे कि तुम क्यों आँसू छुपाये बैठी हो
बह जाने दो इन्हें
कोई तो हो जो सुने मेरे दिल की बात
मुझसे भी पहले
कहे मुझसे तुम्हारा दिल सिर्फ तुम्हारा नहीं उसपर मेरा नाम लिखा है
कहे मुझसे दर्द जो छुपा रखा है इस दिल में
अपना सा लगता है मुझे
कहे मुझसे सारे जहाँ की बात भूल कर सिर्फ
महसूस कर उस पल को जब आँखों ने आँखों से बात की थी
कोई तो हो जिसके कंधे पर सर रखूँ और भूल जाऊँ दुनिया को
याद रहे तो बस उसकी मेरी वो प्यारी मीठी बातें
कहे मुझसे इन कंधों पर बिखरी तुम्हारी जुल्फें एक साया है मुझपर तुम्हारा जिसे हमेशा मैं अपने पास रखना चाहूंगा
कहे मुझे हाँ इश्क है मुझे तुमसे
हाँ इश्क है मुझे तुमसे

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बता नहीं सकती कितनी परेशान हूँ मैं
कभी जानने की कोशिश की है तुमने
कि कितनी परेशान हूँ मैं
तुमने तो कभी समझा ही नहीं मुझे
हमेशा अपने में ही मगन रहे तुम
कुछ कहना तो दूर की बात है
दिल की बात समझ ही नहीं पाए तुम
हमेशा अपने में ही मगन रहे तुम
अब कुछ कहना नहीं
कुछ सुनना नहीं
बस इतनी सी बात है
तुम भी खुश रहो हम भी
जो कुछ भी हमारे बीच था
वो प्यार था या नहीं पता नहीं
लेकिन अब इतना पता है
ये प्यार दुबारा होगा नहीं

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नक़ाब में भी पहचान लेते हो हज़ारों के बीच........
हमने मुस्कुराकर कहा.......
तुम्हारी आँखें देखकर ही इश्क किया तुमसे हज़ारों के बीच..

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जो गर्मियों की शाम में
हवा का इक ख्याल है
वो प्रेम है
सवाल के जवाब में
अजीब सा सवाल है
वो प्रेम है
जो सर्दियों की धूप में
सुकून का एहसास है
वो प्रेम है
जो भीड़ में भी गुम ना हो
जो खर्च करके भी कम ना हो
वो प्रेम है,
वो प्रेम है

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मेरी साँसों की झनकार थे तुम
मेरा सोलह सिंगार थे तुम
मेरी आँखों का इंतजार थे तुम
हाँ मगर ये सच था मेरे भगवान थे तुम

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"ये उन दिनों की बात है - 40" by Misha read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19919664/its-matter-of-those-days-40

"JAB WE MET - 1" by Misha read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19919283/jab-we-met-1