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ए खुदा, यदि बड़े और समझदार होने से लोग बुरे और स्वार्थी भी हो जाते है, तो तू मुझे कभी भी बड़ा मत बनाना.

प्रजासत्ताक दिन विशेष देश को समर्पित सुहानी की जिंदगी
जरूर पढ़ें 'बेगुनाह गुनेहगार' on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/novels/3515/begunaah-gunehgaar-by-monika-verma

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रोए तो हम तब जब तू साथ नही था,
हम तो तब भी हस रहे थे जब दुनिया हम पर जैसे पत्थर फेंक रही हो ऐसे गम दे रही थी।

कुछ कहानिया अच्छी नही लगती। लेकिन यदि वो किसी का जिंदगी की हक़ीक़त हो तो? सोचा है वो इंसान कैसे जी रहा होगा???

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एक छोटी सी कहानी। पढ़ने में अच्छी लगे या न लगे। हर कोई इस बारे में अनुभव जरूर करता है। कुछ हक़ीक़त सामने आती है तो कुछ हमेशा के लिए राज़ बनकर कही दफन हो जाते है। कुछ चुप चाप सह लेते है तो कुछ बन जाते है गुनेहगार। ऐसी ही एक कहानी पढ़िएगा जरूर। आखिर तक। बेगुनाह गुनेहगार।
Hi, Read this series 'बेगुनाह गुनेहगार' on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/series/3515/

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