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यह जिंदगी तो है जो हमें जरूरतमंद बना देती है।
ये जरूरते ही जिंदगी में नयाब सपने बुनती हैं
जिस दिन जिंदगी कि जद्दोजहद जरुरते चली गई
मै तो समझती हूं कि शरीर से आत्मा निकल गई
कभी अपनों की जरूरत होती है तो कभी सपनों की
कभी धन की जरूरत होती है तो कभी वैभव की
एक जिजीविषा होती है इनको पाने की
ना मिल पाने पर रह जाते हैं हम जरूरतमंद





#ज़रूरतमंद

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मुझे तिनके का साथ चाहिए
चींटी जाती पानी में समा
तिनके गर ना बचाया होता
वैसे तो छोटा वजूद इसका
तिनके ना होते में जज्बात
चींटी का अस्तित्व ना होता
मुझे होता कुछ अचरज
चींटी हो या हो तिनका
दोनों का अस्तित्व होता है छोटा
चींटी ने किया हाथी को परास्त
एक तिनके से जंगल में आग
तिनका हो या चींटी
दोनों ही होते सृजनकारी
तिनके से बनते घोसले
#घोंसला

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यूं तो तिनके के बनते घोसले
भावनाओं का ताना बाना
जिसे हम कहते आशियाना
पक्षी के के हौसलों से
असल में बनते घोंसले
तिनके की अहमियत
शायद हमें ना होती पता
यदि डूबती चिटी को
यूं ना मिला होता
तिनके का सहारा

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शरारत करना जीवित रहने का प्रमाण है
मनमानी तो नहीं परंतु नादानी चलती है
कभी-कभी चेहरे पर मुस्कान सजती है।
आज के समय में हंसने ये बहाना


#शरारती

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जीवन के अंतिम दिनों तक मुझे अपना वजूद चाहिए मुझे लड़ना नहीं है ।किसी से लड़ाई है, मेरी खुद नहीं उतरना खरी दूसरों की निगाहों में क्योंकि जब मां सीता स्वयं देवी होकर देती है परीक्षा, तो ऐसे में मैं स्त्रियों की क्या करूं समीक्षा परीक्षा देते देते पहले सीता मां आग में समा गई उसके बाद भी जब ना हुआ चुनौतियों का अंत तब जाकर उन्होंने पृथ्वी में लिया खुद समा जब ऎसा द्वापर युग में था चलन सोचती हूं मैं क्या कलयुग क्या होगा इसका चरम
#अंतरिम

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मुझे लगता है कि रिश्ते जज्बातों से संबंधित होते है उसके जेहन में चारों पहर जज्बातों का घेरा होता है
#संबंधित

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किसी भी परेशानी का जन्म उम्मीदें होती हैं
यूं परवाने को भी पता है होता है अंजाम
फिर भी कर देता है अपनी जिंदगी शमा के नाम
#जन्म

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दीपक तो घर को प्रकाशित करता है
परंतु मन के अंधेरों का क्या करे
वैसे तो जुगनू प्रकाश का बिंदु होता है
फिर भी अंधेरों में जगमग होता है
इसी तरह बिंदु मात्र की समझदारी
उज्जवल भविष्य की भागीदारी है
वैसे तो बूंदों का वजूद बिंदु का है
वही बूंदे कभी-कभी सैलाब लाती हैं
ऐसे ही व्यक्ति की समझदारी
पथ पथ उसके काम आती है

#उज्ज्वल

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कभी-कभी लगता है वैर ना में रखु किसी से परंतु मैं उस जल की तरह हूं जिसने आप जैसा रंग डालोगे रंग जाऊंगी
चीनी डालोगे तो मधुर एवं नमक डालोगे तो खरा एवं कटु डालने पर कड़वा हो जाता है जल का स्वभाव घुलनशील है और व्यक्ति संवेदनशील इसलिए किसी के सहज नेचर को उसकी कमजोरी ना आंके क्योंकि समय समय बलवान होता है वह कभी ना कभी आपको भी उसी राह पर खड़ा कर देता है जहां पर आपने किसी और को खड़ा किया था इसलिए कर्मों से करने से पहले व्यक्ति को आत्म चिंतन करना नितांत आवश्यक है
#पूछना

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बिना पूछे जो तुम्हारे दर्द को समझे, समझो वही फरिश्ता है ,वही नुमाइंदा है, जिसे खुदा ने तुम्हारी खैरियत के लिए इस जहां में भेजा है
#पूछना

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