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न तो कोई कवि हुँ मैं,ना ही कोई ज्ञानी बड़ा बस चंद शब्दों का मैं सौदागर लिख लेता हूँ कि बस थोड़ा सा, नकल की अकल नही सो बस वही लिख पाता हूँ जो दिल से निकलती और दिमाग में बस जाती है

जब वो पहरे पे होते हैं, सारा वतन चैन से सोता है।
सर पर कफन लपेटे हुए,हर पल वो मौत से लड़ते है।

दुश्मनों की छाती चीर कर,वो देश की रक्षा करते है।
मातृभूमि के वीर जवानों को,शत शत बार नमन मेरा।

आतंक की जलती भट्टी में,बेमौत मारे गए जवानों को।
हम भूल नही सकते कभी,उन वीरों के बलिदानो को।

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