Born n brought up in a RSS Swayamsevak Parivaar. Heard stories of Shivaji and Lakshmi bai rather than prince or princess. Got primary education @ Saraswati Shishu Mandir. Started reading Premchand in early childhood. Trained Plant Pathologist. Later turned into SBCC and SBCM Program designer. Won first Kadambini Sahitya Mahotsav prize for story Thake Hare and many more later. VO artist, worked a lot at AIR Lucknow both as presenter and writer. Writing passion -short stories. Sometimes research

ये अकेले लंबे जानलेवा रास्ते,
परत दर परत उदासियाँ,
आंसुओं से लड़ते जाने की ज़िद
फिर बेवजह जीना............
आंसुओं को पलकों पे सुखाना
कांपते होठों से
मज़बूत शब्दों में बोलना
मैं ठीक हूँ.............................

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तुम्हारी भुवनमोहिनी मुस्कान,
मेरा वसंत।
मेरे रसवंती नयन,
तुम्हारा वसंत।
सहज साथ,
अपना वसंत।
#कृष्ण #प्रेम #वसंत #माधुर्य

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क्या,
सूरज की किरणें,
झर झर पतझर,
इतराता वसंत,
झूमता बौर,
गाती कोयल
तुम्हें, अपने साथ नहीं दिखते?
जब सृष्टि साथ है,
तो किसके साथ की आस है?

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उनका प्रेम गीत

नदी के किनारे की उस सड़क पर,
जब वो चुपचाप चलते,
तो बांसुरी का संगीत साथ चलता सुनाई देता.
जब बात करते चलते,
तो गोधूलि में वापस आती गायों की घंटियाँ सी सुनाई देतीं.
कई बार चलते चलते थक कर,
वो एक दूसरे की हथेली थाम कर चलने लगते,
तो उन्हें लगता वो बादलों पे तैर रहे हैं.
वो तेज आँधियों में भी,उसी सड़क से जाते थे,
मजबूती से एक दूसरे का हाथ थामकर,
तब उन्हें लगता जैसे वो कोई विजयी सेनापति हैं
और भरी बरसात में, बूंदों से अठखेलियाँ करते हुए.
जब वो उस सड़क से जाते,
तो उन्हें लगता जैसे वो अमृत की बूँदें हैं....
वो क्या है उनके बीच,
जो चुप्पी को बांसुरी में,
शब्दों को घंटियों में,
थकान को बादलों की सैर में
आँधियों को विजय में,
और बारिश की बूंदों को ,
अमृत में बदल देता है.....

प्रेम.......यही है क्या

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जानते हो,
वो जो तुम्हारे पीताम्बर से,
हर पल मेरे भीतर,
बसंत झरता रहता है,
वो थोड़ा सा बाहर बिखर गया है।
पीली सरसों फूल गयी है
आम्रवृक्ष बौरा गये हैं
भ्रमरगुँजन कर रहे हैं
कोकिला कुहुक रही है
मुरझाए सूर्यदेव भी चमक उठे हैं।
अभी रति ने पूछा,
ये थोड़ा सा छलका हुआ वसंत है,
तो सृष्टि इतनी मदमस्त है
जहां बसंत हर पल झरता है
वहां कैसा लगता है?
बताओ, रति को क्या उत्तर दूं?
#कृष्ण #बसंत #प्रेम

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तुम्हारे पीताम्बर से रंग गए
सरसों के फूल
तुम्हारी आँखों सी चमकने लगीं
नयी कोपलें
तुम्हारी बांसुरी की तान सी बोल उठीं
कोयलें
तुम में खोया अलसाया मन
सपनों में मयूर पंखी रंग
आ गया #वसंत #कृष्ण

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क्या हुआ #कृष्ण ,
जो तुम वृंदावन छोड़ गए,
इससे राधिका के,
गोविंदप्रिया होने का,
अभिमान तो कम नहीं होता न !!

प्रेम कथाएं लिखी नहीं जातीं
जी जाती है।
जो प्रेम कथाएं जी जाती हैं
वही सबसे खूबसूरत होती हैं....
उतनी परिपूर्ण, जितने राधा-माधव ...

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अजनबी दीवाली उतरती है मन के आंगन में,
उदासियों के अंधेरे,गहरे
और गहरे होते जाते हैं...

मैं उन पलों में ठहरी हूँ,
तुम जा रहे थे,
मैं पथरायी आँखों से देख रही थी,
नमी को रोक दिया था मैंने पलकों पे,
ताकि अन्तिम दृष्टि तक तुम्हें देख सकूं.
देखते ही देखते,
तुम गोधूली के बादलों में खोकर
ओझल हो गए थे.
जानती थी,
भविष्य के गर्भ में महाभारत है,
तुम अब कभी वापस वृन्दावन नहीं लौटोगे.
सूरज ढल चला था,
वृन्दावन की धरती का ऋण मुझ पर बाकी था.
पावों को वापस सन्नाटे भरी कुञ्ज गलियों में घसीट रही थी.
तभी लगा तुम्हारी बांसुरी कहीं पुकार रही थी,
तुम्हारा पीताम्बर उस अँधेरे में सूर्य-किरण सा लगा,
तुम्हारा श्यामल वर्ण जमुना में घुला सा लगा,
और तुम्हारी भुवन-मोहिनी मुस्कान,
आकर मेरी पलकों पे बैठ गयी.
ठहर गयी हूँ तब से,
तुम्हारे जाने के पीड़ा में डूब जाऊं
या हर पल में तुम्हारे होने का उत्सव जियूं
बताओ #कृष्ण ?
#तीन_युग

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