Hey, I am on Matrubharti!

बारीश का मौसम, ठंडी हवाएं और हाथों मे चाय, बस यही तो सुकून है! ☺

-मनमंजिरी

कुछ यादें थी तुम्हारी ,जो तुम्हे वापस लौटानी थी बहुत रुलाती थी हमे वो,राते जब विराणी थी!

-मनमंजिरी

Happy new year 2022😊🤗☺

हम तो तब भी लिखते थे ,और अब भी लिखते है ,
हम तो तब भी लिखते थे, और अब भी लिखते है , जनाब...फर्क बस इतना सा है की, पहले दुसरों के लिए लिखते थे, आज खुद का मन बहलाने के लिए लिखते है!

-मनमंजिरी

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सबको खुश रखते रखते ,
खुशियों ने ही मुँह मोड लिया
हसते खेलते आँगन मे अब ,
गम का ठिकाणा रहे गया.

-मनमंजिरी

बिना कुछ कहे ही ,
बहोत कुछ कह दिया तुम ने
एक प्यारीसी मुस्कुराहट को ,
आसुंओ से भिगोया तुमने.

-मनमंजिरी

जितना हो सके उतना दूर ही रहो हमसे , सुना है पास आने से दूरियाँ ज्यादा बढती है...

-मनमंजिरी

पुन्हा पुन्हा त्याच वाटा
पुन्हा पुन्हा तीच वळणे
विसावा हवा क्षणभर आता
पून्हा नको तेच बहाणे...

एकांत आज प्रिय भासे
स्वतःतच गुंतणे,स्वतःतच रमणे
नको मतलबी गर्दी भवताली
एकटेच गावे जीवनगाणे...!!

-मनमंजिरी

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आज हार गये फिरसे हम ,
उनके जुबाँ को दाद देनी चाहिये
झूठ भी सच कर देती है...!

-मनमंजिरी

यादों का शोर अक्सर गुंजता है हमारे कानों मे,
याद दिलाता है तुम्हारी कमी भरे महफिलों मे।

-मनमंजिरी