×

Like to write But took a long pause from it Now wanna resume my writtings and would Like to publish them If found situable

खुद को जला कर उन्हें कुन्दन बना दिया ।
हीरा बनते ही उनको आइना दिखा दिया ।।
नमिता "प्रकाश"

"दो बोल प्यार के भी क्या ,
कमाल दिखाते हैं ।
लगते हैं दिल पर ,
औंर चेहरे खिल जाते हैं ।।"

प्यार की उन बाँतो से ,
दो चार मुलाकातों से ।

बन जाते हैं रिश्ते ,
गहरे जज्बातों से ।

चाँद भी दमक उठा ,
तेरी नूर भरी रातों से ।

याद आते ही बरस पडी ,
अंखिया बरसातों से ।

जोड़ लिए है रिश्ते ,
अब हर हालातों से ।

प्रेम का यह अटूट बंधन ,
गहरा है , सब नातों से ।

'प्रेम दिवस " की शुभ कामना ,
प्रेषित , प्रिय दोस्तों से ।

Read More

चाँद उतरा है प्यार के आगोश में ,
खो न जाना कही तुम मदहोश मे ।
दिल क्या मिले चल पडे सिलसिले ,
अब तो गाओ तराने जोश ही जोश में ।।

Read More

॥एक यक्ष प्रश्न॥
मां! मेरी क्या पहचान है ?
मैं किसकी संतान हूं ?
जैसे ही तेरी कोख में ,
मेरा स्पंदन हुआ ,
सहा नहीं गया किसी को मेरा आना ,
माँ !....???
क्या मैं जायज या नाजायज थी?
क्या मैं तेरा लहू न थी ?
या मेरे लिए ….
तेरे दिल में जगह न थी ।
क्या मुझ में नहीं भगवान है ?
ना रंग कोई न रुप कोई ,
फिर भी ------
यह किसके मन का शैतान है?
मेरे आने की आहट से ,
मां ! मुझे क्यों दर-बदर कर दिया ?
कचरे में या गटर में फेंक दिया ।
तेरे खून के हजारों बिलबिलाते टुकड़े ,
चीख -चीख कर कह रहे थे ,
मां !तूने यह क्या किया ?
मेरे आने से पहले ही मुझको मार दिया ।
तू भी तो एक नारी थी ,
तुझे भी तेरी मां ने ,
यूं ही मिटा दिया होता ,
तो तू आज कहां होती है ????

Read More

अंधेरे बहुत हैं कहीं खो न जाऊँ ,
तसव्वुर में अपने समा लीजिए ।

मोम सा मैं हरदम पिघलता रहा ,
आँसुओं की नदी में मैं बहता रहा ।
खुद को तलाशने की खातिर में ,
खाक बीहड़ों की मैं छानता रहा ।।
नमिता "प्रकाश"

Read More

तेरे बिन रहती परेशान जिन्दगी ।
कुछ दिन की मेहमान जिन्दगी ।।
सबके सपनों को ढोते -ढोते ,
हुई मुर्दा औंर ,बेजान जिन्दगी ।।
कठिन राहो से गुजर कर यह जाना ,
इतनी नहीं है आसान जिन्दगी ।।
रंजो -गम की खलिश सहते -सहते ,
मुद्दतें बीती इक मुस्कान जिन्दगी ।।

Read More

इतने हसीन ख्वाब जो दिल में पलते हैं ।
अफसोस वो जीवन में नहीं मिलते हैं ।।
" नमिता "

दिल के इतने ही नजदीक होते ,
तो चर्चे हमारे भी मशहूर होते ।
सरगम सी बनकर साँसों में ,
महफिल में चश्मे -नूर हम होते ।।
नमिता "प्रकाश"

Read More