Like to write But took a long pause from it Now wanna resume my writtings and would Like to publish them If found situable

जिंदगी तेरी नुमाइश बहुत देखी है ।
अतीत में फिर जी ले ख्वाहिश यही मेरी है ।।
नमिता "प्रकाश"
#अतीत

#अतीत
हम दुनिया में चाहे जितना भाग ले लेकिन अतीत से कभी पीछा नहीं छुड़ा सकते ।

#भटकना
तुम मिले जिंदगी को सहारा मिल गया ।
भटकना क्या जब किनारा मिल गया ।।
नमिता "प्रकाश "

#रिश्ता
दिल ही दिल में जो जज्बात समझे
बिना कुछ कहे जो हर बात समझे ।
होठों का फूलों से रिश्ता है ऐसा ,
पलके झुका कर हम मुलाकात समझे ।।
नमिता "प्रकाश"

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तुमने जो कहा वह ,
प्यार ही तो था । दिल ही दिल में चाहा ,
इकरार हुआ तो था ।।
दिल की दिल से दिल्लगी अच्छी नहीं सनम ,
नजरे -इनायत वो इसरार ही तो था।।
नमिता "प्रकाश "

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तेरे दर्द को हम तोअपना समझ
जिन्दगी को हम जिए जा रहे थे ।
बेमुरव्वत सी तेरी बेवफाई को
शाकी समझ कर पिए जा रहे थे ।।
Namita

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सारे शिकवे भुला कर
चलो साथ चलते हैं ....
चार दिन की जिंदगी मे,
यह पल फिर
कब मिलते हैं ?????
Namita

खामोशियों के भी अपने ....
जवाब होते हैं ????
कुछ ना बोलो तो .......
बेहिसाब होते हैं.????
Namita

इस दिल को खिलौना समझकर
तुमने जो खेल खेला था ।
टूट गई है उम्मीदें सारी ,
एहसासों का मेला था ।।
Namita

इश्क को हम तो खुदा समझ बैठे थे ।
लेकिन वो ....
जाने औंर क्या समझ बैठे थे ????
Namita