Like to write But took a long pause from it Now wanna resume my writtings and would Like to publish them If found situable

दिल की गहराइयों में
तुम उतर कर देखना
आंख से चश्मा हटाकर,
आंसुओ में झांकना
प्रीति की ठंडी छुवन
गर तुम्हें महसूस हो
अपना दिल फिर तुम
दिल पर ही तुम हारना

-Namita Gupta

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ना गुलाल है ना मलाल है मगर दोस्ती बेमिसाल है!
बिछड़ कर अपने चमन से हुआ बांगवा बेहाल है!!
नमिता "प्रकाश"

-Namita Gupta

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जो ढूंढते थे खुद को अल्फाज में मिले!
ख्वाबों, ख्यालों हर राज
में मिले!
जो करते थे हमेशा मुकद्दर की बातें,
जो भी मिला है मुझको आज में मिले!!

-Namita prakash

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लिख कर के अपने दिल के जज्बात क्या करूं?
हर दर्द में शिकन है फिर बात क्या करूं?
ख्वाहिशों को यूं ही तुम कैद ना करो,
अल्फाज बोल उठेंगे मैं शिकायत क्या करूं??
नमिता "प्रकाश"

-Namita Gupta

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समय को आप कितने भी इल्जाम दीजिए!
लेकिन जब वह आता है, तब वह प्रश्न चिन्ह आप पर भी लगा जाता है!!
Namitha "Prakash"

-Namita Gupta

हर कदम कुछ न कुछ सिखाती है जिंदगी!
क्या सही क्या गलत बताती है जिंदगी?
यह सबक भी कितने अनमोल होते हैं--
कुछ ना लाए थे यहां ना ले जा पाओगे जिंदगी!!

-Namita Gupta

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जिनको गुंमा है मेरे बिन कुछ हो नहीं सकता !
वह मुकद्दर का शहंशाह हो नहीं सकता !!
जिसने ठान लिया है कुछ भी कर गुजरने का-
उस फरिश्ते को कोई तूंफा रोक नहीं सकता!!

-Namita Gupta

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मेरा होना ना होना जरूरी नहीं!
तेरा होना ही मेरे इश्क की मुकम्मल निशानी है!!
तुम समझो या ना समझो यह जरूरी नहीं
यह रिश्ता पाकीजा- ए-रूहानी है!!
नमिता "प्रकाश"

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तुम मेरे लिए कुछ ना कह पाए !
हम तेरी खातिर सहते गये!!
लफ्जों की बात करूं मैं क्या ?आंखों में आंसू पीते गए!!
नमिता "प्रकाश"

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