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Like to write But took a long pause from it Now wanna resume my writtings and would Like to publish them If found situable

किताबों में लिखा, वो सब पढ आया ।
जरूरत पडी तो कोई ,सबक न याद आया ।।
नमिता "प्रकाश"

शब्द से खुशी ,शब्द से गम ,
शब्द से पीडा़ ,शब्द से मरहम

ऐ खुदा मेरे तू इसरार तो कर ,
जिसे भी दे मोहब्बत उसे इन्कार न कर ।
नमिता "प्रकाश"

यह जिन्दगी भी बडी हसीन लगती है ।
कुछ मीठी सी ,कुछ नमकीन लगती है ।।
नमिता "प्रकाश"

खुद से खुद ही खुदा बन बैठे ।
जाने वो यह क्या कर बैठे ?

जिन्दगी के ख्वाब बहुत सुनहरे होते हैं ।
अपनो से मिले जख्म बडे गहरे होते हैं ।।
नमिता "प्रकाश"

खामोशियाँ तेरी हमें बेचैन करती हैं,
नजरें -इनायत फिर भी तस्कीन देती हैं।
चुपचाप यूँ ही जिन्दगी से चले जाना ,
गुस्ताखियों की खलिश गमगीन करती है।।
नमिता "प्रकाश"

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पिता क्या होता है ,यह अब हमने जाना।
ऊपर से सख्त ,दिल है मक्खन पहचाना।।
जहाँ की धधक से वो सदा दूर रखते ,
देते वटवृक्ष की छाया ,हैं शहद यह पुराना।।
नमिता "प्रकाश"

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क्या खता थी हमारी ,हक अदा कर दिया ।
देख कर उनके अश्क ,जुदा कर दिया ।।
नमिता "प्रकाश"