I am novice writer trying to learn the art of writing, also a Law Learner and Life Enthusiast.

नज़रिया आपका हमसे अलग क्या हुआ,
दिलों का भी बटवारा हो गया ।
सोच आपकी ज़रा ना मंज़ूर क्या हुई,
हमारा अब मेरा - तुम्हारा हो गया।

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तेरी फिक्र में हम,
अपना ज़िक्र भी भूल गये ।

रूप के उपर प्राण न्योछावर,
मन का घड़ा टटोल प्रिये ।
दिया न रोशन करता जग को,
घृत का ब होता मोल प्रिये ।

अपने आप का साथ दो , कहने वाले तो कहते ही रहेंगे I

दुःखी होगा परिवार,
सदस्य एक कम हो जायेगा।
बोलने वालों की ज़बान पर,
मगर लगाम कौन लगायेगा।
हौंसला तो रखना होगा,
कि सह लें कटाक्ष, सवालों को।
सांत्वना कौन देगा फिर,
मेरे बाद मेरे घरवालों को।
यकीनन बहुत सहा होगा,
असह्य वेदना होने पर यह कदम लिया होगा।
अब सिर्फ बोलने वालों की शक्ति बढ़ जायेगी।
चार थे वो अब आठ हो जायेंगे।
हम मगर तब तक जीव से ख़ाक हो जायेंगे ।

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तलाश किस की करें ?
समय की या ख़ज़ाने की?
समय की तलाश में ख़ज़ाना गवा बैठेंगे
और ख़ज़ाने को तलाशते हुए समय
निर्भर आप पर है
तलाशना चाहेंगे या जो है उसका सदुपयोग करना चाहेंगे।

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#उग्र
उग्र स्वभाव मनुष्य के पतन का कारण होता है।

#शीघ्र
शीघ्र नहीं मिलती ऊंचाइयाँ ज़माने में,
कोयले से हीरा बनने में सदियाँ निकल जाती हैं।

# शांत
विपरीत परिस्थिति में शांत रहना कहाँ आसान है,
मज़बूत इरादों वाले की ख़ूबी है यह ,
न कि कमज़ोरी का निशान है।

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#कीमती

जीवन की क्या कीमत जानोगे,
यह है नगीनों से भी कीमती।
यह रहा तो सब कुछ मुमकिन है,
वरना क्या कीमत निर्जीव देह की।

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