Meri chahat tumshe hi

परख मुझे सोने चांदी की होती तो अच्छा होता

तुम्हें इश्क़ करके में मुर्गा तो न बनता ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

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ख़ुदा की इबादत करें

या फ़िर कोई मंदिर में पुजा करें

हर जगह शांति मिलता है हमें ।

मगर कोई भूखे को रोटी खिलाने से

उसका आशीष मिलता है हमें ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

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मुझे आस्तिक से ज्यादा

नास्तिक लोग पसंद हैं ।

जो धर्म से ज्यादा इंसानियत को मानें

वहीं इंसान भगवान को भी ज्यादा पसंद हैं ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

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धर्म चाहें कोई भी रहे हर किसी का

वो हर इंसान को जीने की राह बताता है

मगर इंसान हीं अपने स्वार्थ के आगे

इंसानियत की बलि चढ़ाता है ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

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दर्द दिलों का हसिनाएं कहां समझती है

खामखां इश्क़ के नाम पर

आशिकों को बदनाम करती है ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

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वज़ह में तुझे बताऊं अपनी

या फ़िर खुद की गलति कहुं

चाहें जिस कि भी गलती हुई है

मगर आटे की तरह तों में ही पीस रहा हूं ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

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મનમાં મારા અનેક સવાલો ઉભા થાય છે

જ્યારે મારા પોતાના જ

મને પારકાં બનાવીને જાય છે ......

નરેન્દ્ર પરમાર " તન્હા "

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तुम्हारी यादें हररोज सताती है मुझे

ना दिन को चेंन

ना रातों को अब नींद आती है मुझे ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

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खाब मेरा अधूरा रहें गया

तुझे इश्क करके भी

ऐ दिल " तन्हा " हीं रहें गया ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

दर्द दिलों का हसिनाएं कम हीं समझती है

इश्क के नाम पर आशिकों का बाजा बजाती है ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "