Hey, I am on Matrubharti!

*मुक्तक*
आसमां से झर रहा गहरी अंधेरी रात का नीला ज़हर
कर रहा शबनम में घुल प्यासी जमीं को तर-बतर
उसी को चाँद की प्याली में भर पीते हैं मेरे ख्वाब
मदहोश से फिर भटकते हैं जब तक ना हो जाए सहर

-नीलम वर्मा

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एकल पंक्ति हाइकु
' हर सुबह मिट्टी में खेलते स्वर्ण कण '
- नीलम वर्मा

🎭 हाइकु 🎭
* कठपुतली दूर से दिल्ली आई*
कठपुतली
दूर से दिल्ली आई
करे कमाई
*
सीख गई है
नये नारों की भाषा
शुरू तमाशा
*
नाच दिखाती
रैली में नाप-तोल
बजता ढोल
*
बहाती खूब
आँसू घड़ियाली
बजाओ ताली
*
हुक्म है आया
मोमबत्ती जलाओ
हवा बनाओ
*
डोर खींचता
बाजीगर सयाना
फैलाया दाना
*
साधी बंदूक
कठपुतली कंधा
चमका धंधा
*
किया कमाल
लो सरपट दौड़े
सियासी घोड़े
*
चुनावी मुद्दा
पड़ जाए ना ठंडा
संभालो झंडा
*
कठपुतली
करतब करती
जीती मरती
*
होने ना देगी
कभी हौसले पस्त
दिल्ली दूरस्त...

: नीलम वर्मा

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बहुत रोएंगी सारी रात तारों की किरण परियां
बेवफा हो कर अगर वो चाँद उनसे रूठ जाएगा
- नीलम वर्मा

मैंने चाहा रोक ले वो दूर जाने से मुझे
पर उसे मेरी यही यायावरी अच्छी लगी
- नीलम वर्मा

एकल पंक्ति हाइकु
'विजयश्री'
*श्रद्धा सिय की राम में विजय प्राप्ति श्रीमंत्र*
🏵शुभ धनतेरस🏵