Hey, I am on Matrubharti!

रंग तो बहुत देखे ,
पर आपसा नहीं,
नूर भी लाजवाब है खास,
पर आपसा नहीं
गुलाब है हम
गुलशन हो आप
पर फिजाएं नहीं
इत्तिफाक है वक्त का
वरना हम कहां कम नही

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दोस्ती बडी शरारती होती है
वक्त आये तो हारना फर्माती है
तेरा साथ हर पल थामना सिखाती है
हो न हो साथ पलपल , पर साथ जमाती है
कल का हर बुनयादी ख्याब बताती है

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वादो का क्या ये मुकरते है जिंदादिली को हर रोज खुश भी रखते है जिने की ख्वाहिश पलको से पढते है फिर ना कहेना वो हमसे लढते है

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आधा हिस्सा तेरी साधना मे लग जाये हर काम का हल सुलझ जाये

मुझ जैसा बनना चाहोगे,
या फक्र खुद फरमावोगे,
जलती हू जब जब, रोशन करती हू हरपल .

बाज था वक्त जो, जी भर जी लिया
नजाकत ने ईसकी हर जख्म भर दिया
खामोश थे हम भी ,जो हर गम पी लिया

विलक्षण थे नजारे कही,
रंगो की चमक ने कर दिये गुमराह वही

सरल स्वभाव भी कभी -कभी अपने आप को भारी पडता है

चुनींदा से लगते है फूल
अनकहे ख्वाब कहते हैं
सून
आने की खुशबू मे महकी फिजा
कह देना फूलो से आज का रंग जमा खूब

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