Hey, I am writting on Matrubharti!

भरकर जहर दिल में
कहा तक जावोगे
सांस रोककर कब तक
जी पावोगे
थक हारकर जब भी लौटोगे
अगर तुम तय्यार होतो
हम तुंम्हे फिर अपना बनाएंगे

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नशा हो या प्यार
हमेशा तगडा करो

जख्म हुआ पाव में
तो उससे चलना सिखे
जख्म हुआ दिल पे तो
इंसाण की पहचान
सिखे.

कौन अपना कौन पराया
ये पहले समझ लो
अपना खून भी
घाव लगते सबसे पहले
निकल जाता है.

.हजारो लोग थे
फिर भी दिल तुमपे आया
बाकी लोगोसे
अच्छा लगा तुम्हारा साया

जब भी तुम बोलती थी

बहोत था सुकून 'तेरी बोली में

अब खफा है तो
और अब हर अल्फाज गाली लगता हैं

तू वक्त से तेज
हो गयी
मैने हिसाब रखा था सालो का
तू चंद मिनटो मे निपट गयी

जान तो हमारी

वैसे ही चली गयी

ना पिस्तौल चली

न इलज़ाम लगा

बनाया है घर मैने
कुछ दूर राह छोडकर
इस यकीन में
काश रास्ता भटक कर ही
मेरे तरफ आवोगे😣

नाराज होना लाजमी है तुम्हारा
पर हम भी वो है
जो एक बार ठुकरा गये तो
फिर उसकी शकल भी नही देखते