Hey, I am on Matrubharti!

वक़्त कैसा भी हो बीत ही जाता है।
तूफ़ान भी आके गुज़र जाता है।।
कुछ रोने तो कुछ हंसने के वास्ते।
बीते वक़्त की निशानियां छोड़ जाता है।।
©निमिषा

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प्रेम के बन्धन में बंध कर आया जग का पालनहार।
भक्त प्रेम है बंध कर बन बैठा गोकुल का ग्वाल।।
©निमिषा

वो अपने अल्फाजों से हमें पागल बनाने आया है।
नादान है बड़ा हमें तो उसकी सादगी ने मारा है।।
©निमिषा

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ज़िन्दगी जीने की कुछ इस तरह सजा मिली।
आंखो को आंसूओं की सौगात मिली।।
जीते रहे हम जिनके लिए उम्र भर।
चोट दर चोट उनके ही हाथ मिली।।
© निमिषा

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बात ही बात में बात निकल आती है।
बन्द झरोखों से भी बात निकल जाती है।।
कोई समझाएं हमें कि मुहब्बत है क्या।
हमें तो उनकी इबादत ही समझ आती है।।
©निमिषा

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खामोशियों का भी अपना ही मजा होता है।
दर्द दिल का अक्सर इनसे ही बयां होता है।।
वैसे तो पीड़ा कि इक और अलग कहानी है।
जितना हंसता चेहरा हो उतनी पीर पुरानी है।।
✍️निमिषा

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इश्क़ के फसानों का भी इक फसाना है।
कहीं पार होना है तो कहीं डूब जाना है।।
✍️निमिषा

रख के अपने सीने पर पत्थर
हसरतें अपनी लिखते मिटाते हैं हम
बेरंग बेजान सज़ा ए ज़िन्दगी है
न मालूम इसे कैसे जिए जाते हैं हम
✍️निमिषा

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जब जब तुम्हारी याद आती है
दिल को खुशी दे जाती है।।
अंधेरों से लड़ती ज़िन्दगी में
दो पल का सुकून दे जाती हैं।।
✍️निमिषा

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कभी इक आंख हंसती है
तो दूजी रो ही जाती हैं।।
छुपाओ लाख ज़माने से
ज़माने को ख़बर हो ही जाती है।।
✍️©निमिषा

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