पढ़कर सुकून तलाशती हूँ और लिखकर सुकून मिल जाता है ...

वो तो आदतन मुझे अक्सर ही चोट पहुँचाता रहता है,
वो तो मैं ही हूँ जो कभी-कभी अपनी आदत से चूक जाती हूँ!
सिसकियाँ भरना भूलकर अनायास ही चीखने-चिल्लाने लग जाती हूँ,
और इस सभ्य समाज की नज़र में एक बार फिर वो एक प्रताड़ित पति और मैं एक अत्याचारी पत्नी बनकर रह जाती हूँ!!
राष्ट्रीय बालिका दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं मुझे भी और आप सबको भी🙏💐💐💐🙏

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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काश कि होती मेरी बेटी
जिसे मैं संस्कारों के साथ साथ
समझदारी की भी देती सौगात
उसे समझाती रख खुद का
आत्मसम्मान करो सबका सम्मान
नाजायज पर चुप्पी तोड़ो
जायज पर खुल के बोलो
मेरी बेटी हो तुम मेरा अभिमान
खुद को बनाओ बिटिया सशक्त इतना
कोई कर न सके तुमसे खिलवाड़!!
आप सभी को इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे की हार्दिक शुभकामनाएं👼
निशा शर्मा...

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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#सिक्सवर्ड्सस्टोरी
उसकी गरीबी ही
उसका गुनाह है।

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

#वनलाइनर
उसनें अपनी भूंखी आँखों से मेरा बलात्कार किया।

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

#वनलाइनर
तुम्हारी यादें आज भी मेरे दामन से लगी हैं,
तुम आखिरी बार मेरा दामन भिगोकर जो रोये थे।

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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#वनलाइनर
लोग उसे मनहूस कहते हैं क्योंकि जन्म लेते ही उसके सिर से माँ का साया जो छिन गया ।

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

कभी असफलताओं की धूप तो कभी
सफलताओं की छाँव का मेल है
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं बस
धूप छाँव का खेल है !

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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ज़िंदगी की तपती गर्म रेत सी राहों में
कभी बिखरी कभी टूटी
कभी बिखरकर टूटती
मेरी अनगिनत चाहों में
न जाने कितनी बार लौटना चाहा
तेरी पनाहों में
मगर हर बार जकड़ लिया मुझपर पड़ती
मेरी जिम्मेदारियों की पैनी निगाहों ने
चाहकर भी न लौट सकी मैं कभी तेरे
प्यार की छाँव में ...

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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तेरी यादों के चिराग ज़रा रौशन कर लूँ
मेरी तन्हाइयों की धुंध अब
कुछ तो छंटने वाली है क्योंकि
शाम होने वाली है !

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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बाबुल के बागों की नन्ही कलियाँ बेटियाँ
माँ के घरौंदे की चुलबुली चिड़ियां बेटियाँ

भईया का मान बेटियाँ
मायके की शान बेटियाँ

ससुराल की लाज बेटियाँ
दो परिवारों का स्वाभिमान बेटियाँ

कभी चंचल कभी गंभीर
कभी हंसतीं छुपा नैनों का नीर

खुद से पहले सोचें सबकी
कभी पत्नी कभी माँ
कभी बहू तो कभी बहन का
किरदार बाखूबी निभाती बेटियाँ

न मकान न दुकान न जायदाद
न पैतृक सम्पत्ति का
लोभ दिखाती बेटियाँ

ये तो बस चाहें थोड़ी सी ममता
थोड़ा सा प्यार और इनके हिस्से का सम्मान
इससे अधिक कुछ न मनायें बेटियाँ

बेटा बेटी के फ़ेर में पड़कर
न गंवाओ बेटियाँ

देवी समान पवित्र ये बेटियाँ
भक्षक बन मत रौंदो इनको
बनकर रक्षक बचाओ बेटियाँ

नसीबों से नसीब होती हैं बेटियाँ
बेटियाँ ये बेटियाँ...
आप सभी को बेटी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🙏💐🙏


निशा शर्मा...

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