पढ़कर सुकून तलाशती हूँ और लिखकर सुकून मिल जाता है ...

न जाने कितनी बार तूने मुझे रूलाने की कोशिश की मगर मुस्कुराने के बहाने ढ़ूंढ़ लाने में हम भी कुछ कम तो नहीं!
तू लाख बिछा दे कांटे मुश्किलों और दर्दों गम के मेरी राहों में ए जिंदगी
मगर मुसीबतों से डरकर मुंह छुपाने वाले हम
तो नहीं!!

-NISHA SHARMA

‘YATHARTH’

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कितनी आसानी से भुला देता है यहां कोई भी किसी को!
ज़रा ये भूलने की दवा हमें भी मुहैया करा दो।
बड़ी मुद्दत से गड़ा है ये यादों का खंजर मेरे सीने में,
मेरे मालिक अब मुझे भी मेरे हिस्से का सुकून अदा करो!

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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#वनलाइनर
"उसकी तस्वीर पर बिखरे हुए रंग मेरी वफ़ाओं के हैं।"

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

#सिक्सवर्ड्सस्टोरी
आत्महत्या अनेकों आत्माओं की हत्या है ।

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

इस दुनिया में सबसे बड़ा जुर्म है एक औरत होना और उससे भी बड़ा जुर्म है एक बुद्धिमान औरत होना!

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

हमें उनके लिए जीना चाहिए जो हमारे लिए जीना भूल जायें!

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

कई कमरों का हुआ करता था जनाब,दिल उनका,जब वो एक कमरे के मकान में रहते थे ।
नहीं कमरा एक भी जनाब,दिल में  अब उनके क्योंकि  आज वो कई कमरों का मकान रखते हैं ।

 निशा शर्मा...

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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बीमारी, हांँ मुझे है बीमारी ,
एक नहीं , मुझे कई हैं बीमारी ।

मेरी बीमारियों का आप,
वैसे इलाज तो नहीं कर पायेंगे ।
मगर हम फ़िर भी आपको,
इनके बारे में ज़रूर बतायेंगे ।

हाँ मुझे अपने विचारों को ,
व्यक्त करने की है बीमारी ।
सही को सही और गलत को गलत,
कहने की है बीमारी ।

कितने भले लोगों ने मुझे,
मेरा भला बताया ।
हम तो आपके भले
के लिए कह रहे हैं ,
ये जुमला हमपर चिपकाया ।
फ़िर भी नहीं हो पाया हमारा ,
इलाज, ये अभी भी है जारी ।

किसी की चापलूसी करके आगे बढ़ नहीं सकते
किसी की काट जड़ें , हम फल नहीं सकते
यही कुछ दोष रखते हैं ,हम ईमानदारी के ,
इसे कहिये हमारा फ़ख्र या हमारी लाचारी ।

बीमारी, हांँ मुझे है बीमारी ,
एक नहीं , मुझे कई हैं बीमारी ।

निशा शर्मा...

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उदासीभरी हंसी तुम क्यों हंसती हो ?
सबके आगे बैठती हो , बुत बनके,क्यों अपनी बात नहीं रखती हो  ?
जब कोई पूछता है तुमसे, तुम्हारी खुशी तो तुम सच क्यों नहीं कह सकती हो ?
अपनों का सोचकर , तुम ये अपमान सहती हो ।
तो क्या तुम इसे अपनों का सम्मान समझती हो ?
सम्मान गर चाहिए सबका, तो पहले खुद का सम्मान करो ।
अभिमान  की  बात नहीं है  यहाँ मगरअपने स्वाभिमान का मान करो ।
कमजोर या अबला मत समझो खुद को न ही बोझ जैसे शब्दों का ध्यान करो ।
बस अब उठो ,  खड़ी  हो  ,
करते हुए सबका सम्मान
खुद का भी सम्मान करो  ।
निशा शर्मा ...

-NISHA SHARMA ‘YATHARTH’

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दिखावा बहुत जरुरी है आजकल इस दुनिया में दिखने के लिए मगर क्या करें कि हमें तो प्रभु का नाम भी मन के भीतर ही पुकारने की आदत है!

NISHA SHARMA

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