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ये कहानी है उन शादीशुदा कपल्स की जो अपनी रोज़ मरह की जिंदगी से तंग आ चुके है रेल की पटरी की तरह चलते-चलते थक चुके है जो चाहते तो है अपनी जिंदगी में ज़ायका लाने के ...Read More

माना कि मैं शादीशुदा मर्द हुँ तो क्या ख़्वाब भी न देखूँ.. रागिनी से मेरा रिश्ता दिलसे टुट चुका है पर फिर भी निभाए जा रहा हूँ सात फ़ेरोंके वचनोंको क्या कहीं मैंने प्यार पाने ...Read More

मैं तो एक साधारन सी हाउस वाईफ हुँ, दो बच्चों की मॉम. भला मुझमें कोई क्यों इंटरेस्ट लेगा मेरा आत्मविश्वास दिनबदिन ढलता चला जा रहा था. और अब तो कोई उम्मीद भी नहीं बची थी. एमबीए करके ...Read More

अपने मर्जी के बिना ज़िन्दगी जीना क्या होता हैं उसका तो कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता. पर जिये जा रहा हूँ बस्स...! खाली बोतल की तरह लुढ़कते जा रहा हूँ. उसे अब पानी से भर दो या शराब ...Read More

बिना पीछे मुड़कर देख वहाँ से चली गयी. मॉम का हाथ पकड़कर चलते हुये उस वक्त मन में यहीं ख़याल आ रहा था कि, चाहें कुछ भी हो, कितना भी बुरा वक्त हम पर आए माँ-बाप कभी हमारा साथ ...Read More

एकबार भी मैने उसकी ओर पलटकर नहीं देखा वो शायद रो रहीं थी पर मुझे अपने घर लौटना था मैं गलतियोंको सुधारना चाहता हुँ उन्हें दोहराना नहीं चाहता दीया भी मेरी ...Read More

अचानक मेरा ध्यान गया है भगवान..! प्रीत न जाने कबसे वहाँ खड़ी थी लगता हैं उसने सब सुन लिया..! नेहा भी उसके पीछे पीछे चली आयी समीर अब भी मेरी बाहों में था..! ...Read More