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परेतनी की शादी by Sapna Badh in Hindi Novels
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से...
परेतनी की शादी by Sapna Badh in Hindi Novels
 मैं खाने के मामले में बड़ा ही शातीर था। जब मै खाना खाने बैठता था तो चार पांच लोगों का खाना मै अकेले खा जाता था।इसलिए आम...
परेतनी की शादी by Sapna Badh in Hindi Novels
वे वस्त्र किसी राज महाराज को भी मात करने वाले वस्त्र थे। रेशमी रंग असली सोने की कढ़ाई वाले चमचमाते हुए वस्त्र ! जैसे अभी...
परेतनी की शादी by Sapna Badh in Hindi Novels
मेरे हामी भरने के बाद वह मुझे खाने की मेज पर ले आई,तब तक दोनों अधेड़ व्यक्ति वहां पर मेरी सेवा के लिए उपस्थित हो चुके थे...
परेतनी की शादी by Sapna Badh in Hindi Novels
वह सुन्दरी मुझे जगा हुआ देखकर उसने मेरी ओर देखा और मुस्कुराई तब तक वे दोनों अधेड़ प्रकट हो चुके थे एक ने मेरे हाथ धुलवाए...