जिस जीवन में तुम थे by SHREYA INDUSHREE in Hindi Novels
कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, हमारे साथ तस्वीरों म...
जिस जीवन में तुम थे by SHREYA INDUSHREE in Hindi Novels
किसी-किसी रात समय सो जाता है।घड़ी चलती रहती है, रात आगे बढ़ती रहती है, लेकिन भीतर कहीं सब कुछ ठहर जाता है।उस रात समर के...
जिस जीवन में तुम थे by SHREYA INDUSHREE in Hindi Novels
अप्रैल की शुरुआत में शहर पर एक अजीब-सी धूप उतरती है।न वह सर्दियों की कोमल धूप होती है, न गर्मियों की कठोर।बस एक ऐसी धूप,...
जिस जीवन में तुम थे by SHREYA INDUSHREE in Hindi Novels
कुछ दिनों बाद समर को एक और पत्र मिला।इस बार कागज़ के साथ एक पुरानी तस्वीर थी।लेकिन तस्वीर में कोई चेहरा नहीं था।सिर्फ़ ए...
जिस जीवन में तुम थे by SHREYA INDUSHREE in Hindi Novels
सितंबर की शुरुआत थी।वर्ष का वह समय जब पेड़ हरे तो रहते हैं, लेकिन उनकी हरियाली में एक थकान उतरने लगती है।जैसे मौसम को पह...