अंधेरी रात का राज़ by Mannu Gujjar in Hindi Novels
रात के करीब बारह बजे थे। पूरा गाँव गहरी नींद में सो रहा था। चारों तरफ सन्नाटा था और दूर पहाड़ों से आती हवा पेड़ों को हिल...