Hey, I am on Matrubharti!

उनकी अगुवाई में मूंदी आंख सारे शहर ने।
#द्वेष के औजार से जेहनों पे नक्काशी हुई।।
#द्वेष

अपने समय की कितनी अजीजी हयात दी।
वो मेहरबान जिसने सियाही-दवात दी।।

सुविधाएं दी जहां ने मुझे सुख के नाम पर।
#दूल्हा -दुल्हन रहित बड़ी लंबी बरात दी।।
#दूल्हा

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बहुत मजबूत है यादों का पिंजरा।
#भुलाना भी नहीं आसान इतना।।
#भुलाना

चेहरे न रहे भावों के दर्पण कि शहर में ;
पहचान किसी शख्स की फिर एक नजर में !
#चेहरा

यादों की इक बयार ने मन गुदगुदा दिया।
#महसूस यह हुआ तू मेरे आस-पास है।।
#महसूस

व्यर्थ किसी को दीजिए; मत आदर सम्मान।
जो लायक हो कीजिए; उसका ही गुणगान।।
#आदर

शुभ शगुन हूं अनिष्ट भी मैं हूं।
शिष्ट हूं मैं अशिष्ट भी मैं हूं।।

डूबकर देखिए कभी मुझको।
मैं सरल हूं तो क्लिष्ट भी मैं हूं।।

#शिष्ट

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कवि हूं अपने भाव को; देता हूं लय छंद।
पढ़ते हैं जब आप तो; मिलता है आनंद।।
#आनंद

पहुंचे नियति पे अपनी कि चलते रहे थे हम।
कछुए की चाल से सही पूरे लगन से हम।।
#नियति

#बनावट का हुनर बेवजह दिखलाना नहीं है।
किसी सुलझी हुई गुत्थी को उलझाना नहीं है।।
#बनावट