युवा साहित्यकार एनआर ओमप्रकाश "अथक"। (बी. कॉम) पीपाड़ सिटी, जोधपुर (राज0) 342601 रचनाएं - एक रिश्ता ऐसा भी...(संस्मरण) (2018),अंतिम पत्र - बचपन की दोस्त के नाम(2018), मासूम की मौत का गुनहगार कौन?(2019), पहला प्यार अधूरी दास्तां(2018) ( कहानियां) प्रकाशित। और दोस्त की संघर्षशील जिंदगी..उपन्यास (2019) उसकी याद में.. काव्य संग्रह (अप्रकाशित)। समान - आंचलिक साहित्यकार एवं फणीश्वरनाथ रेणु। मो. 9783450868 Email: nenarampipar1999@gmail.com Insta: poet_athak Twitter : @nr_omprakash

यार - दोस्त, गुरु - शिक्षक, जिगरी - दुश्मन, अजनबी - रिश्तेदारी छोटे हो या बड़े आप सबसे मैंने जीवन में कुछ ना कुछ सीखा है।। चाहे वो अनिवार्य ज्ञान हो या फिर अनावश्यक ज्ञान मगर मुझे हमेशा आप लोगो से कुछ नई सीखें मिली है। मेरे जीवन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आने वाले सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं।।

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हमने मां पर लिखना शुरू किया।
मां ने मुझे लिख दिया अब मां पे भला क्या लिखूं।
इस पंक्ति में ही शब्द सिमट गए।।
#पंक्ति

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जब हो जाए तुम्हारे बेटी।।
तो बांहे फैलाकर स्वागत करना।।
बेटों से प्यारी होती है बेटियां।।
भीड़ की बातों में उलझकर,
तुम भी कहीं खो मत जाना।।
कुछ नहीं मांगती है सिवाय प्यार के
भले सारे दिन ना सही मगर
शाम को मुस्कुरा के बतला देना।
जब थक जाओगी एक उम्र के पड़ाव पर
सहारा बनने दौड़ आयेगी
बस शर्त एक बार पुकार लेना।।
सब कुछ सहेगी, मगर
किसी को कुछ नहीं कहेगी।
जब कोई मुसीबत आ पड़ेगी।।
अकेले ही लड़ेगी झगड़ेगी।। मगर
तुम पर कोई आंच नहीं आने देगी।।
जब बेटी पैदा होगी तुम बहुत भागयशाली होगी।
जब बेटा पैदा होगा तो तुम किस्मत वाली होगी।।

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