मेरा लेखन में रुचि है और लिखने की हॉबी है.अपना और औरों का जीवन सार्थक हो जाये.इसी आपा -धापी में थोड़ा वक्त निकाल लेता हूँ....मेरा पहला उपन्यास "संघर्स और सपने "2009 में प्रकाशित हुआ है.दो उपन्यास "जीवन -चक्र ",शीबा इसके अलावा दृश्यवर्णन पट कथा छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित होना है....समय के अभाव में लिख नहीं पा रहा था....writer omprakash jain ka flipcart me sangharsh aur sapne novel padhe...mujhe mob no .6266387533 me apna sujhaw dene ki kast kare...taki lekhak ki manobal badh sake ....

भारत अमर उजाला

भारत की आन बान सान भारत की सौर्य सक्ति पर निर्भर करता है ।कि हमारा देश कितना सैन्य बल से शाक्तिशाली है ,वैज्ञानिक दृष्टिकोण से और उद्योग प्यापार में कितना परिपूर्ण है ।शिक्षित होना भी देश के विकाश का प्रमुख कारण है।शिक्षा की तकनीकी गुणवंता पर भी असर होता है ।
ऐसे में भारत एक अमर उजाला बनते जा रहा है ।पूरे विश्व जगत में मोदी जी के कार्य शैली से प्रभावित हो चुके है ।
भारत का विकाश इस दौर में तेजी से होते जा रहा है।देखते ही देखते एक अलग बदलाव दिखाई देने लगेगा।अब अखंड भारत की परिकल्पना साकार होने की राह पर चल पड़ा है।
दुश्मनों पर वार करना अब भारत से सीखो।हमारे देश की राजनीति और कूटनीति ,विदेश नीति की परिभाषा ही बदल चुकी है ।

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लिखने का कुछ याद नही
क्या लिखूं जो लिखा है मैं
उसे पढ़ने को किसे फुरसत
पढ़ लिया तो लाइक क्यों करे
कॉमेंट्स लिखे तो क्यों लिखे
अपना ना पढ़े तो तुम्हारा क्यों पढ़े

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अभी दुनियां में सब ठीक ठाक चल रहा है ।सभी देश अपने सामर्थ्य अनुसार तरक्की की सीमा में है।येसा नहीं है कि सभी देश अमीर हो और एडवांस हो।हम अपने भारत से तुलना करते हैं ।पहले दूरदर्शन ,कंप्यूटर ,मोबाइल ,फ़ोन नहीं था तो विदेशों की जीवन शैली,वहाँ की संस्कृति और सभ्यता की जान कारी आम आदमी को नहीं होता था ।आवागमन का साधन भी नही के बराबर था ।इंडिया में शिक्षा का अभाव बहुत था ।अब लड़की -लड़के सब एक साथ पढ़ते है।और देश विदेश की यात्रा,शिक्षा,जॉब और ब्यापार किया जा रहा है ।अब भारत बहुत तरक्की किया है ।जीवन बहुत सरल हो गया है।

भारत कई चीजों में आत्म निर्भर होते जा रहा है।सैन्य सक्तियाँ भी पहले से बढ़ गया है।विदेश नीतियां भी सम्मान जनक मान्यताएं मिल रहा है।मोदी जी ने वर्तमान में भारत की पहचान विदेशों में दिया है ।भारत में सभी प्रकार के संसाधनों से परिपूर्ण है।इसे दोहन की जरूरत भर है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी बढ़े है।अंतरिक्ष की खोज में भी सर्वपरि है।

यहाँ की संस्कृति और सभ्यता में भी बदलाव हुए है।हिंदी भाषा का प्रचार -प्रसार विभिन देशों में हो रहा है ।हमारे भारत की संस्कृति को विदेश में अपनाई जा रही है ।भगवान कृष्ण के कई भक्त बन रहे हैं।अनाज पर पहले से ही हम आत्म निर्भर हो चुके थे।कंप्यूटर भी आ चुकी थी।राजीव जी ने लाया।अब पूरा दुनिया मुठ्ठी में है।एक चरवाह के पास भी मोबाइल है ।भिखारी भी मोबाइल रखने लगे है।भारत पहले भी गरीब नहीं था अब भी गरीब नहीं है।भारत सोने की चिड़या कहलाती थीं ।अंग्रेजो ने लूट कर ले गए।

पड़ोसी देशों से लड़ाइयां और मित्रता होती है।भारत का कई विकशित देशों से दोस्ती और कई चीजों में डील हो रही है ।भारत एक दिन विश्वगुरु जरूर बनेगा ।राजस्थान की मरुस्थली भूमि में ब्रमांड की शून्य की खोज होगा ।जिसमें 98 प्रतिसत सफल हो सकेंगे।फिर सारा दुनियां थम जाएगा।ब्रेन आगे सोचना बंद हो जाएगा ।।।

बेंगलोर में विश्व की मानव रहित मंत्रालय कंप्यूटर और रोबोटिक होगा।जीवन की शैली और वैज्ञानिक,तकनीकी विकाश चढ बढ का होने वाला है ।इसे कोई नहीं रोक सकेगा।

अच्छा कोविड19 कोरोना वाइरस से लोग बहुत भयभीत हो गए थे।स्वाभाविक है सरकार और जनता को भयभीत होना ।इसमें केवल जनसंख्या घटे है।जो प्रारद के प्रकृति के द्वारा जनसंख्या व अर्थव्यस्था का संतुलन का नियम है ।कुल का विनाश नहीं ।और इकोसिस्टम का संतुलन भी है।कोविड से जन मानस की परिवर्तन भी हुआ है।

ये मेरा निजी दृष्टिकोण से अपना विचार ही है।आप को पढ़ कर अच्छा लगे तो जरूर कॉमेंट बॉक्स में लिखे। बहुत -बहुत धन्यवाद💐💐💐💐💐☺️😊😊😊😊😊😊😊😊😊😢😢😢😢😢

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कुदरत ने इंसान को बनाया है और इंसान भौवतिक संसन्धानों को निर्मित किया है।फिर भी इंसान अपने को भगवान से तुलना करता है।आदमी धरती से चंद्रमा ,मंगल तक पहुँच गया है।हमें विचार करना है कि उस ग्रहों को किसने बनाया।हमें अपने अविष्कार पर गुरुर नहीं करना चाहिए।

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