Hey, I am on Matrubharti!

"કઈક રીત જગત ની એવી છે
દરેક સવાર ની સાંજ થઈ...

તું કોણ છે ? તારું નામ છે શું ?
સીતા પણ અહીં બદનામ થઈ..."

"रुह जुड़ी थी आपस में ये धागे कच्चे ना थे...

इश्क तो मजबूत था अपना भी पर शायद तेरे इरादे पक्के ना थे..."

तेरी इस दुनिया में ये मंजर क्यो है
कहीं जख्म तो कहीं पीठ में खंजर क्यो है,

सुना है तू हर जरेॅ में है रहता,
फिर जमी पर कहीं मंदिर कहीं मस्जिद क्यो है,

जब रहने वाले दुनिया के हर बंदे तेरे है
फिर कोई दोस्त तो कोई दुश्मन क्यो है,

तू ही लिखता है हर किसी का मुकद्दर,
फिर कोई बदनसीब तो कोई मुकद्दर का सिकंदर क्यो है...

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सितम सह कर भी कितने गम छिपाए हमनें,
तेरी खातिर हर दिन आसूं बहाएं हमनें,

तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला,
तेरे दिए जख्म हर एक से छिपाए हमनें...

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"જ્યારે કૃષ્ણના વિરહ મા
રાધા ની પ્રીત દુભાણી

ત્યારે સોનાની નગરી પણ
પાણી મા સમાણી..."

दिल हजार बार चिखे,
चिल्लाने दिजिये...

जो आप का नहीं हो सकता,
उसे जाने दिजिये...

हे ठाकुर जी तुमने सबकी
तकदीर सवारी है...

अब तो कह दो कि अब तेरी बारी है...

कुछ लोग खोने को प्यार कहते है,
तो कुछ लोग पाने को प्यार कहते है,

पर हकीकत तो ये है
हम तो बस "निभाने"
को प्यार कहते है...

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જમાનો કાલે પણ ખરાબ હતો અને આજે પણ છે દ્રોપતિના ચિર હરણ કરવા વાળાને લોકો ભુલી ગયા..
અને જેણે સીતાને હાથ પણ નથી લગાડયો તે હજું સુધી સળગે છે...

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