જય દ્ધારકાધીશ

ठहर कर कभी, सूरज देखता ही नहीं
तभी रोज़ शाम संवरती है, उसके लिए.



~परेश डांगरे

‘मीठा झूठ’ बोलने से अच्छा है ‘कड़वा सच’ बोला जाए..

इससे आपको ‘सच्चे दुश्मन’ जरुर मिलेंगे लेकिन ‘झूठे दोस्त’ नहीं!



~शायराना बादशाह

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शब्द ही जीवन को
अर्थ दे जाते है,
और,
शब्द ही जीवन में
अनर्थ कर जाते है.



~परेश डांगरे

कागज़ पे तो अदालत के
फैसले मंजूर हो ते है...

हमने तो
तेरी आंखों के फैसले को
मंजूर किया !!


~परेश डांगरे

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सूरज की फ़िक्र है कि
अंधेरा कहीं ना हो

और रात अमावस को
लिये घूम रही है.


~परेश डांगरे

चढ़ते सूरज के पुजारी
तो लाखों हैं साहब...

डूबते वक्त हमने सूरज
को भी तन्हा देखा है.




~परेश डांगरे

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"जिंदगी"

"एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..
दूसरा सपना देखने के हौसले को जिंदगी कहते हैं"



~परेश डांगरे

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उम्मीदों के धागे,ख्वाहिशों की पतंग, सब जला दी हमने कल रात अंगीठी में...!


~परेश डांगरे

સાહેબ, હારેલા માણસે કદી નિરાશ થવું નય કારણ કે, એ હાર માંથી તેને આગળ આવા ના નવા રસ્તા અને નવા માણસો મળે છે.



~પરેશ ડાંગરે

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-પરેશ ડાંગરે