@fun_lover1234

वो हमें पत्थर और खुद को मोम कहकर निकल गये..

हम अपनी जगह डटे रहे और वो किसी और पर पिघल गये..

जिंदगी के मानसून का..
ये आलम है.. हुजूर...

रिश्तों की नदियाँ मर रहीं..
मतलबपरस्ती के नाले उफ़ान पर है...

किसी ने पूछा समाज को आगे बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए,

एक विद्वान ने जवाब दिया-

"टांग के बदले हाथ खींचो,
समाज अपने आप आगे बढ़ेगा !!"

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