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मन्नू की वह एक रात (उपन्यास) अप्रैल 2013 में प्रकाशित, दो कहानी संग्रह, नाटक एवं पुस्तक समीक्षाओं का संग्रह शीघ्र प्रकाश्य कहानी एवं पुस्तक समीक्षाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हर रोज़ सुबह होती है (काव्य संग्रह) एवं वर्ण व्यवस्था पुस्तक का संपादन लखनऊ में ही लेखन, संपादन कार्य में संलग्न

साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका किस्सा में
मेरे कहानी संग्रह की समीक्षा प्रकाशित हुई है. इसे अहमदाबाद की ही डॉ. सुविधा पंडित जी ने लिखा है.
मैं उन्हें और पत्रिका के संपादक जी को धन्यवाद देता हूँ.

Matrubharti के प्रिय मित्रों मेरी इस पुस्तक की सभी कहानियाँ Matrubharti पर भी आप पढ़ सकते हैं.

आज ही के दिन इमर्जेंसी लगी थी. मौलिक अधिकारों को भी समाप्त कर दिया गया था.
उस समय की भयावह स्थिति सहित और बहुत कुछ को जानिए,
भीतर तक झकझोर देने वाली मेरी कहानी

"करोगे कितने और टुकड़े" में.
Matrubharti पर ही..

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मातृभारती पर विगत दिनों मेरी एक कहानी
शेनेल लौट आएगी प्रकाशित हुई थी
ऐसे ही एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह पर आधारित है. इस कहानी को पढ़ने के बाद कोई ऐसे गिरोह का शिकार नहीं बन सकता.
इन गिरोह ने Facebook e मेल जरिये मुझसे भी संपर्क किया था.
मैं इनकी बातों का जवाब दे दे कर इन्हें उलझाए रख कर इनके तौर तरीकों को समझ ता रहा. जब इन्हें लगता कि मुझे नहीं ठग पाएंगे तो दूसरे नाम से संपर्क करते.
जब ये थक गए तो गायब हो गए.
इनकी कुछ e mail मेरे पास आज भी हैं.
आज के दैनिक जागरण में यह खबर छपी है
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कहानी को पढ़िए और ठगों से बचिए...
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यह कहानी एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह के महिला - पुरुष सदस्यों की है जिनके कारनामों से अमेरिका तक परेशान है.
यह दुनिया भर में मेल के जरिए अपने शिकार को फंसाते हैं. हो सकता है कि आप में से बहुतों के पास उनकी मेल आई हो. मेरे पास भी आई थीं. बराबर आती रहीं. मैं उनका जवाब भी देता रहा. मुझे क्यों कि इनके बारे में जानकारी थी इसलिए ये मुझे शिकार नहीं बना सके. लेकिन इनके सिस्टम को समझने के लिए इनसे मेल के जरिए वार्ता करता रहा. यह सिलसिला करीब एक साल चला. आज भी इनकी बहुत सी मेल मेरे पास सुरक्षित हैं.
इस कहानी का नायक अपने को इनसे भी बड़ा शातिर समझता था. वह रेलवे की माल गाड़ी में गार्ड है लेकिन इतना बड़ा उस्ताद कि गार्ड के डिब्बे को भी अपनी परम खुराफातों का अड्डा बना रखा था, बल्कि आज भी यह क्रम जारी है. मेल के जरिए इसका भी संपर्क होता है. दोस्तों के आगाह करने पर वह उनकी बातों को हवा में उड़ाता रहा. आखिर घटनाचक्र ऐसे घूमता है कि 20 - 22 वर्षीय ठग युवती हज़ारों मील दूर दूसरे देश से उसके घर नोयडा आ कर रहने लगती है.
उसके बाद दोनों आश्चर्यजनक ढंग से पूरा भारत घूमते हैं. ऐसे रोमांचक, आश्चर्यजनक करनामों को अंजाम देते हैं कि पढ़ कर यकीन होता कि यह भी हो सकता है.
लेकिन ऐसा हुआ और सच में हुआ.
क्या-क्या हुआ पढ़िए इस अनूठी कहानी को
Matrubharti पर...

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मेरा यह उपन्यास दो उम्रदराज सगी बहनों की बरसों बाद मुलाकात के दौरान पूरी रात हुई बातचीत पर आधारित है.
बड़ी बहन भावना में बह कर जो अनर्थ किए जीवन में वह बताने लगती है.
यह सोच कर कि बहन उसके साथ खड़ी होगी. दुनिया ने उसे धोखा ना दिया होता तो उससे एक बाद एक अनर्थ ना हुए होते.
लेकिन बहन की जो प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हुई उससे वह हतप्रभ हो जाती है. सोचती शेष अनर्थ ना बताऊँ, लेकिन बहन विवश कर देती है तो उसने सबसे बड़ा अनर्थ बताने के लिए जो रास्ता चुना वह इतना हाहाकारी था कि छोटी बहन ने उसे उसके सबसे बड़े अनर्थ से भी बड़ा अनर्थ बताया.
इस उपन्यास की तुलना आलोचकों ने
अज्ञेय जी के उपन्यास"शेखर एक जीवनी " से की है.
इसे एक मनोवैज्ञानिक मनोविष्लेणात्मक उपन्यास कहा है.

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मेरी 10 चुनिन्दा कहानियों के इस संग्रह की

उत्कृष्ट कहानियाँ पढ़िए
Matrubharti पर