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તળાવ પણ ભરાઈ ગયા રીમઝીમ વરસાદથી,
તો મારા પ્રેમના વાવાઝોડાંથી તારું દિલ ભરાઈ જાય એમા નવાઈ સું...??

तुमने गौर नही किया !
जब हमने अपने आपको तुम्हारा अपनासा कर दिया !!

मेरे लिये तो तू वो सुबह की चाय की तरह है ।
जो मसालेदार महेकी हुई और एकदम जरुरी ।।

બસ, આજે તું એમ જ યાદ આવી
આપણે સાથે વિતાવેલ બે પળ યાદ આવી
તારી ખિલખિલાટ હસતી આંખો યાદ આવી
તારી એ નટખટ વાતો યાદ આવી
તે ગુસ્સા માં આપેલ ગાળો યાદ આવી
એ સાથે વિતાવેલ સાંજ યાદ આવી
બસ...
આજે તું એમ જ યાદ આવી...

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तुम्हारे बारे में लिखूं भी तो क्या लिखू,
तुम तो बिल्कुल उस चाँद की तरह हो,
जिसमे खुबसूरती भी है,
नूर भी है,
गुरुर भी है,
और मुजसे दूर भी है ।।

अगर बात करू तेरी आंखो की तो उसमे मिलावट है ईतर और सराब की,
कभी महेक जाता हू
तो कभी बहेक जाता हू ।।

मना की तुम दूर हो मुजसे पर एक बात याद रखना जैसे रेत की जरुरत हर रेगिस्तान को होती है,
सितारों की जरुरत हर आसमान को होती है,
वैसे ही तुम्हारी जरुरत हमे भी होती है ।।

और मना की हमे मनाना नही आता पर वादा है आपसे कभी खफा ना होने देंगे हमसे ।

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તને રાહ હતી વરસાદની અને મને રાહ હતી તરી,
હવે તો આવી જા
જો વરસાદ પણ આવી ગયો.

मेरी महोब्बत का हर एक कतरा एक नई महोब्बत है मेरे लिये ।।

तुजे नवाजा था हमारी जिस शायरी से ।
उसी ने हमे बदनाम किये रख्खा है ।।

हम हमारे बच्चोको नया इतिहास बतायेंगे ।
कुछ काला तो कुछ सफेद बतायेंगे ।।
हुई हार लिया बदला ।
हुई रात लिया बदला ।
बदले ने लिया बदला ।
इतिहास ने इतिहास को कभी नही बदला ।।
मरा हुआ जो, मारा हुआ था उसे ।
गरिब से पुछो उसके साथ क्या हुआ ?

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वो शख़्स चाहिये जो प्यार करे मुजे।
वर्नातो हजारो जिस्म बिकते है बाज़ार में ।।