नाम ; डॉ. प्रणव भारती  शैक्षणिक योग्यता ; एम. ए (अंग्रेज़ी,हिंदी) पी. एचडी (हिंदी) लेखन का प्रारंभ ; लगभग बारह वर्ष की उम्र से छुटपुट पत्र-पतिकाओं में लेखन जिसके बीच में 1968 से लगभग 15 वर्ष पठन-पाठन से कुछ कट सी गई  हिंदी में एम.ए ,पी. एचडी विवाहोपरांत गुजरात विद्यापीठ से किया       शिक्षा के साथ लेखन पुन:आरंभ  उपन्यास; ----------- -टच मी नॉट  -चक्र  -अपंग  -अंततोगत्वा  -महायोग ( धारावाहिक रूप से ,सत्रह अध्यायों में दिल्ली प्रेस से प्रकाशित ) -नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि  -गवाक्ष  -मायामृग  -शी डार

बीता कल हवा का झौंका ,आने वाला कल --एक भरोसा 

तिजोरी बुरे वक़्त की ,सिखा जाती है बहुत कुछ !!

आँचल मैला
किया कैसे हमने
झाँकें मन में

अपने साथ गलत व्यवहार करने वालों को नमन , मुझे सिखाया कि मैं उनके बिना जीवित रह सकती हूँ |

देश के माथे की बिंदी
हमारी प्यारी भाषा हिंदी
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मेरे देशवासियों

स्नेहिल नमन
हम आज के दिन अपने संविधान में हिंदी की मान्यता को याद करते हुए इस दिन को उत्सव के रूप में मनाते हैं।

हम इस दिन का सम्मान करते हैं, सही है, किंतु मेरे विचार में हम भारतीयों के लिए केवल एक दिन नहीं, प्रतिदिन अपनी भाषा के प्रति इसी शिद्दत से प्रेम व सम्मान का भाव रखने की आवश्यकता है।

देश है तो हम हैं, देश की भाषा है तो हमारी पहचान है।वास्तव में देश हमारा गर्व है और इसकी भाषा हमारे माथे पर सुसज्जित सूर्य सी बिंदिया! जो हमें उजास देती है,ऊर्जा देती है,पहचान देती है।
आइए, हम सब मिलकर इसको प्रतिदिन व्यवहार में लेकर इसका सम्मान करें,इस पर अभिमान करें।
जय भारत, जय जवान
अपने वीरों का सम्मान
करते हम सब सदा बखान
अपनी भाषा सदा युवान!

डॉ.प्रणव भारती

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गुज़ार दिए कीमती लम्हे ज़िंदगी के ,सीखा अहं !!

jahan santosh n ho ,vahan kuch nahi.

घमंड न करना किसी भी हुनर पर दोस्त ,
डूब जाता है सफ़ीना अपने वज़न से आप |

धागों में बंधा स्नेह ,बरसाता स्नेह !!