लिखना मह़ज एक शौक़ है और कोशिश ..कि खुद में झाँक सकूँ , मेरा स्वरचित रचनाओं का एकल संग्रह "सरगोशियाँ मेरे ख्यालों की" अमेजन पर उपलब्ध है ... प्रांजलि अवस्थी ..

# मेरे शब्द मेरा संबल #

आँखों को मूँद कर
प्रेम की गिरह में उतरना
मेरे लिए खुद को ढूँढ़ निकालना था
ठीक उसी तरह

जैसे कोई चित्रकार
रंग भरते वक्त अपनी आँखों में रंग भरता हो
कोई रचनाकार अपने शब्दों में उतरता है
या कोई पा लेना चाहता हो
अपने ख्वाबों की पूरी कायनात
ले आना चाहती थी मैं
वापस अपने ही रंगों में ढले
अपने एहसासों को
इस जादुई दुनियाँ में

मैं भींच लेना चाहती थी
ममत्व से
अपने ही उस अन- अपेक्षित
मुक्त भाव स्वरूप को
जिसने सारे एहसास खुले मन से खर्च दिये थे
जिसके पास कुछ बाकी नहीं था
लिखने को या कहने को

उस समय मेरा चेहरा बुद्ध की तरह
शान्त और निर्विकार
महसूस किया मैंने

और शायद इसीलिए
मैं नहीं खोलना चाहती थी
वो पलकें जो बोझ से बंद थीं
क्यों कि उन पलकों के आगे उठते गहरे धुयें में
कोई था
जो अपनी सुनहरी कलम से
तो कभी अपनी रंग भरी कूँची से

मेरी हथेलियों पर खींच रहा था
दो समानान्तर चलतीं रेखाऐं
जहाँ एक में प्रेम था
और दूसरी में जीवन
एक जगह क्रास तो एक जगह वक्र

एक अंतिम बिन्दु पर आकर
देखा उसने
मेरी ओर मुस्कुराकर
और गायब हो गया

ये आकृति मेरा संबल थी
मेरी प्रेरणा और प्रेम

मेरे शब्द अब चमकने के लिए अब पुनः तत्पर थे


#pranjali ....

Read More

"कुछ"
जो अशेष है
वो हमेशा बचा रहेगा
तब भी
जब तुम भी नहीं बचोगे

'कुछ'
जो विशेष है
वो वही विशिष्ट है
जिसे तुम हमेशा से बचाना चाहते हो

ये 'कुछ' का होना
जीवन पर
तुम्हारे अस्तित्व का सूद है जो हमेशा बकाया रहेगा

इसलिए इस 'कुछ' को ज़ाया मत करो
स्वयं में निहित करके रखो

Read More

बाँध दिया मैंने जब
शब्दों को सीमाओं में
लगा जैसे कि
कई बाँध मैंने अपनी जिन्दगी पर लगा दिये
कई नदियों का पानी मैंने
अपनी आँखों में रोक लिया
कितने अहसासों का गरल मैंने
शिव की तरह पी लिया
और जीती चली गयी
फिर मैं
वो पूरी जिन्दगी बिना कोई तेज आवाज़ किये ..
बिना निरस्त किये जिन्दगी के साथ किया गया

औपचारिक अनुबंध

Read More

*ll शुभ दीपावलीll*   
आपको ओर आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओॅ के साथ "प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं। धन, वैभव, यश, ऐश्वर्य के साथ दीपावली पर माँ महालक्ष्मी आपकी सुख सम्पन्नता स्वास्थ्य व हर्षोल्लास में वृद्धि करें, इन्हीं शुभेच्छाओं के साथ।"*

*ll शुभ दीपावलीll*

Read More

मन का अस्थिर होना भावनाओं के विचलन की आरंभिक स्थिति मात्र है जो किसी अहम् परिणति की ओर इंगित करती है

शान्त सात्विक निःसीम विचारों की श्रंखला हो तुम
जो निराकार मानस पटल पर अप्रश्नित और अप्रत्यक्ष है ...

बात करना या
बेवजह बात करना
कई बार बहाने खोजने जैसा होता है
आन्तरिक तुष्टि के लिए
किसी अनुसंधान की तरह

इस तरह की खोज करते रहना चाहिए
कई बार अनावश्यक होना
आपके लिए
अति आवश्यक होता है

#pranjali ...

Read More

मैं "मौन" हूँ
जो कभी व्यर्थ नहीं जाता
बस्तियों में उजाला ही रहे हरदम
ऐसा कहाँ होता है
अंधेरा होते ही सब आवाजें सो जातीं है
और मैं ,
हमेशा ही
हर उजाले अंधेरे से वाकिफ़
सदियों से एक कोने में खड़ा
नये नये गल्प
नये अध्याय गढ़ लेता हूँ

जीवन को कुछ तथ्य कुछ सत्य
कुछ वक्त देने के लिए ...

वो सत्य , तथ्य और वक्त
जिसमें मेरी यानि "मौन" की पहचान हो सके

#pranjali ...

Read More

कुछ शक्ल औ' सूरत में ढल गयीं थीं आरजुऐं
इश्क फिर इनसे मैंने , दिल लगा कर किया

#pranjali

आधा इश्क औ' आधा फ़साना
इक तरफ़ मैं इक तरफ़ ज़माना

तू मुझे हासिल , हुआ है ऐसे
शराबी को जैसे दिखे मयखाना

मैं हूँ किधर अब कहाँ खबर है
झूमूँ मैं गाफ़िल पीकर पैमाना

तू मेरा ईश्वर , तू ही खुदा है
कोई ना माने , पर मैंने ये माना

करती हूँ सज़दा कुर्बत का अपनी
जीती हूँ उसको, जिसको है जाना

इश्क है तू ही औ' तू ही दुआ है
होंठो पर ठहरा जो तू ही तराना

एक ख्वाहिश जो मरते की पूछे खुदा
कह दूँ मुझे , मेरी रूह से मिलाना

#pranjali ....

Read More