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आजमगढ़ के साथी #महानपुर_के_नेता अब अपने शहर में ही पा सकते हैं।

आपका स्वागत है...

20वाँ आज़मगढ़ पुस्तक मेला
27 जनवरी-2 फ़रवरी 2020
शिबली नेशनल कॉलेज, आज़मगढ़ (उ.प्र.)

#HindYugm #AzamgarhBookFair #NayiWaliHindi
#PustakMela

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क्या फिर आओगे?

विवेकानन्द तुम्हें जयंती की बधाई। तुम्हें एक बात बताऊँ तुम्हारा जन्म वर्ष वर्तमान वर्ष से जितना ही दूर होता जा रहा है उतने ही तुम प्रासंगिक हुए जा रहे हो। तुमने उस दौर में जन्म लिया था जब गुमराह करने वालों की तादाद कम थी लेकिन फिर भी तुमने युवाओं को दिशा दिखायी। आज तो गुमराही का आलम ये है कि युवा बिन सोचे-समझे भीड़ का एक हिस्सा बनने के लिए लालायित हैं।

तुमने कहा था कि उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको नहीं लेकिन यहाँ न कोई उठना चाह रहा है न ही जागना। बस अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए हर वैध-अवैध प्रयास किए जा रहे हैं और लक्ष्य भी कैसा जो 'स्व' से भरा है 'सर्व' से नहीं। तुम्हारे तो नाम में ही विवेक था जिसका प्रयोग करके तुमने भारतीय ज्ञान का परचम विश्व में फहराया था। युवा तुमसे बहुत प्रभावित थे, आज भी हैं। लेकिन अधिकांश के लिए आज तुम एक बैनर पर बनी आदमकद छवि जैसे हो या उनके झंडे पर बने चित्र से। जिसकी आड़ में वो राष्ट्रभक्त होने का तमगा पा सकें।

तुमने जो कहा, तुम्हारे जो आदर्श थे, तुम्हारी जो अपेक्षाएँ थीं उसे उन्होंने समझा ही कहाँ। हे! विवेक तुम तो यहाँ से चले गए, मोक्ष को भी प्राप्त हुए होगे लेकिन उस देश का क्या जो कभी विश्वगुरु हुआ करता था। आज के युवा को राह दिखाने के लिए केवल तुम्हारा साहित्य ही पर्याप्त नहीं है। उसे पुनः एक विवेक चाहिए। तुम मोक्ष पाकर शांति से कैसे बैठे रह सकते हो? तुम्हें आना होगा, बार-बार आना होगा। बदलते समाज के साथ बदलते युवाओं को बार-बार राह दिखानी होगी। वर्ना सब तुम केवल पूजनीय व्यक्ति बनकर रह जाओगे और विवेकहीन समाज तुम्हारे लक्ष्यों से कोसों दूर होता जाएगा।

https://kachchipoi.blogspot.com/2020/01/blog-post.html

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यदि विश्व पुस्तक मेला जा रहे हों तो आज ही खरीदें #महानपुर_के_नेता और यदि नहीं जा रहे हों तो ऑनलाइन ठिकाने से भी ले सकते हैं-

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लीजिए साहब 48 mp कैमरे से खिंची फोटू और 96 mp(महान पाठक) की दृष्टि से लिखी हुई समीक्षा आपके सामने है। मेरी न सही इन्हीं की मान लीजिए और आज ही ऑर्डर कीजिए #महानपुर_के_नेता

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अच्छी खबर तो यह है कि आजकल फैले प्रदूषण में "अपानवायु" बदनाम नहीं हुई। वर्ना तलवारें खिंच जातीं तलवारें।

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दिवाली और दीवाली दोनों होता है महाशय लेकिन अर्थ अलग होते हैं।

कल से कई कविताएँ/लेख पढ़े जिनमें दिवाली शब्द लिखा हुआ था। जबकि मुझे लगता था कि दीपावली का निकनेम दीवाली होना चाहिए न कि दिवाली। लेकिन मन में संशय था कि इतने लोग लिख रहे हैं तो कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं ही गलत हूँ। इसलिए मैंने शब्दकोश उठाकर देखा। तब पता चला कि

दिवाली=बिक्री
दीवाली=दीपावली

शुभ दीपावली

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कविता जैसा कुछ

आओ चलो मनतेरस मनाएँ ,
आओ चलो मनतेरस मनाएँ ।

हर वर्ष यूँ ही तो करते हैं ,
कि परम्पराओं पर ही चलते हैं ।
लाते हैं आभूषण या बर्तन ,
सांयकाल में पूजन वन्दन ।
चलो अबकि कुछ करें नया ,
हृदय में भरें स्नेह और दया ।

अबकि कुछ अलग कर जाएँ ,
आओ चलो मनतेरस मनाएँ ।

बर्तन चमचम और मन कलुषित ,
स्वच्छ पूजाघर , भावनाएँ प्रदूषित ।
तो कैसे तेरस पर बरसेगा धन ,
जब मैल से ही भरा होगा मन ।
देखो त्यौहार की घड़ी है आई ,
मन को भी स्वच्छ कर लो भाई ।

भरो मन में पवित्र भावनाएँ ,
आओ चलो मनतेरस मनाएँ ।

घर में कितनी साफ़-सफाई ,
अभी-अभी तो हुई है पुताई ।
पर यदि मन में हो कूड़ा-करकट ,
बातों में गर हो झूठ और कपट ।
तब कैसे पूरा होगा त्यौहार ,
जब मन में न हों शुद्ध विचार ।

चलो मन को शुद्ध बनाएँ ,
आओ चलो मनतेरस मनाएँ ।

धनतेरस की हो चुकी तैयारी है ,
पर अब मनतेरस की बारी है ।
पहले तो मन की करें सफाई ,
जिसमें ईर्ष्या की पौध है जम आई ।
फिर द्वेष , घमण्ड को मन से निकालें ,
प्रेम के रंग से मन को रंग डालें ।

स्वयं में कुछ परिवर्तन लाएँ ,
आओ चलो मनतेरस मनाएँ ।

हर धनतेरस कुछ न कुछ लाते हैं ,
अबकि बिन खर्च घर सजाते हैं ।
मन में एक नया सुविचार लाएँ ,
जो सबको हर्षित कर जाए ।
जिसमें निहित हो सबका अच्छा ,
जो हो गंगाजल से भी सच्चा ।

आज मन को निर्मल बनाएँ ,
आओ चलो मनतेरस मनाएँ ,
आओ चलो मनतेरस मनाएँ ।

प्रांजल सक्सेना
#कच्ची_पोई

https://kachchipoi.blogspot.com/2015/

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रक्त बढ़ जाता है जब लोग आपकी प्रथम कृति की यूँ सराहना करते हैं। यदि आपने अभी तक #महानपुर_के_नेता को ऑर्डर नहीं किया है तो अब देर न करें।

‘महानपुर के नेता’ एक बहुत ही महान गाँव की कहानी है। इतने महान गाँव की कि यहाँ महानता की केवल बातें ही नहीं की जातीं अपितु उन्हें व्यवहार में भी उतारा जाता है। 300 बरस पहले महान बाबा ने महानपुर बसाया तो सबसे कहा कि यहाँ न कोई जाति होगी न ही धर्म। सब महानता का व्यवहार करेंगे और सबके नाम के आगे बस महान लगेगा। इस बात को महानपुरियों ने गाँठ बाँध लिया और ये गाँठ तब तक कसकर बँधी रही जब तक महानपुर में चुनाव की चिड़िया नहीं आयी। लेकिन जब चुनाव की चिड़िया ने चहकना आरम्भ किया तो महानता के मायने बदलते गये। एक जोड़ी बूढ़ी आँखों के आगे एक शहरी ने महानता को ही हथियार बनाकर महानता का गला घोंटने का हर सम्भव प्रयास किया। महानता के बोझ तले दबे महानियों के मूल स्वभाव की कुरेदन से बने नये चित्रों की रंगकारी ही है ‘महानपुर के नेता’।

प्रांजल सक्सेना के इस दिलचस्प उपन्यास को ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।

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#MahanpurKeNeta #PranjalSaxena #Satire #Humour #Fiction #HindYugmBlue

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#नवरात्रि

‘महानपुर के नेता’ एक बहुत ही महान गाँव की कहानी है। इतने महान गाँव की कि यहाँ महानता की केवल बातें ही नहीं की जातीं अपितु उन्हें व्यवहार में भी उतारा जाता है। 300 बरस पहले महान बाबा ने महानपुर बसाया तो सबसे कहा कि यहाँ न कोई जाति होगी न ही धर्म। सब महानता का व्यवहार करेंगे और सबके नाम के आगे बस महान लगेगा। इस बात को महानपुरियों ने गाँठ बाँध लिया और ये गाँठ तब तक कसकर बँधी रही जब तक महानपुर में चुनाव की चिड़िया नहीं आयी। लेकिन जब चुनाव की चिड़िया ने चहकना आरम्भ किया तो महानता के मायने बदलते गये। एक जोड़ी बूढ़ी आँखों के आगे एक शहरी ने महानता को ही हथियार बनाकर महानता का गला घोंटने का हर सम्भव प्रयास किया। महानता के बोझ तले दबे महानियों के मूल स्वभाव की कुरेदन से बने नये चित्रों की रंगकारी ही है ‘महानपुर के नेता’।

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‘महानपुर के नेता’ एक बहुत ही महान गाँव की कहानी है। इतने महान गाँव की कि यहाँ महानता की केवल बातें ही नहीं की जातीं अपितु उन्हें व्यवहार में भी उतारा जाता है। 300 बरस पहले महान बाबा ने महानपुर बसाया तो सबसे कहा कि यहाँ न कोई जाति होगी न ही धर्म। सब महानता का व्यवहार करेंगे और सबके नाम के आगे बस महान लगेगा। इस बात को महानपुरियों ने गाँठ बाँध लिया और ये गाँठ तब तक कसकर बँधी रही जब तक महानपुर में चुनाव की चिड़िया नहीं आयी। लेकिन जब चुनाव की चिड़िया ने चहकना आरम्भ किया तो महानता के मायने बदलते गये। एक जोड़ी बूढ़ी आँखों के आगे एक शहरी ने महानता को ही हथियार बनाकर महानता का गला घोंटने का हर सम्भव प्रयास किया। महानता के बोझ तले दबे महानियों के मूल स्वभाव की कुरेदन से बने नये चित्रों की रंगकारी ही है ‘महानपुर के नेता’।

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